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गीतिका के लिए सभी हथकंडे आजमा चुका था कांडा
संदीप गुप्ता | Oct 07, 2012, 07:20AM IST

चार्जशीट के मुताबिक कंपनी में नियुक्ति होने के तुरंत बाद चनशिवरूप को अरुणा और कांडा ने दुबई भेज दिया। इससे पहले गीतिका, गोपाल कांडा द्वारा समाज में उसकी इज्जत को तार-तार करने से परेशान होकर उसकी एमडीएलआर कंपनी छोड़कर दुबई स्थित एमरेट्स एयरलाइंस ज्वाइन कर चुकी थी। कांडा और अरुणा खुद भी दुबई जाकर गीतिका को वापस कंपनी ज्वाइन करने के लिए मनाने की कोशिश की।
जब वह नहीं मानी तो उन्होंने चनशिवरूप को हथियार की तरह इस्तेमाल किया। चनशिवरूप को दुबई भेजना का मकसद उस अनापत्ति पत्र की जांच करना था, जिसे एमडीएलआर कंपनी ने गीतिका के नाम पर जारी किया था। चनशिवरूप एमडीएलआर कंपनी का जांच अधिकारी बनकर दुबई स्थित एमडीएलआर कंपनी के दफ्तर गया।
वहां पहुंचकर उसने एमरेट्स कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से संपर्क किया और एमडीएलआर कंपनी द्वारा गीतिका को दिए गए एनओसी की जांच की बात कही। हालांकि शुरुआत में इससे गोपाल कांडा ओर अरुणा को इसमें कुछ खास कामयाबी नहीं मिली। जब इससे कोई बात नहीं बनी तो कांडा ने शिवरूप को एक ई-मेल भेजा। इस ई-मेल में गुड़गांव के सिविल लाइन थाने में एमडीएलआर द्वारा दर्ज कराई गई फर्जी शिकायत की कॉपी थी।
झूठी शिकायत की थी दिल्ली पुलिस के अनुसार इस शिकायत में कहा गया था कि गीतिका ने फर्जी सर्टिफिकेट और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट पर नौकरी पाई थी। एमडीएलआर कंपनी ने उसे कोई एनओसी नहीं दिया है। उसके द्वारा दाखिल की गई एनओसी फर्जी है। इस फर्जी शिकायत को चनशिवरूप ने एमरेट्स कंपनी के कर्मचारी शिरीश थोरट को दिखाया। जिसकी मदद से कांडा गीतिका को एमरेट्स कंपनी से निकलवाने में कामयाब रहा।





