नई दिल्ली। दिल्ली गैंगरेप केस की पीडिता के लिए आज सारा देश उसकी काल्पनिक पहचान “दामिनी” के नाम से इंसाफ मांग रहा है। उसे यह नाम मीडिया ने दिया, क्योंकि कानून के मुताबिक, पीडिता का असली नाम या उससे जुडी कोई भी जानकारी को उजागर नहीं किया जा सकता । चाहे वह उसके परिजन या दोस्त ही क्यों ना हो। इसी वजह से आज तक लोग देश को हिला देने वाले इस गैंगरेप की पीडिता के नाम से अनभिज्ञ है। ऐसे में समाचार चैनल जी न्यूज पर पीड़िता के दोस्त और इस घटना के एकमाञ चश्मदीद ने सामने आकर सिलसिलेवार पूरा वाक्या बयां कर दिया और पुलिस का अमानवीय चेहरा उजागर किया। (दोस्त ने सुनाई आंखों देखी...'दामिनी' ने की थी बलात्कारियों को जिंदा जलाने की मांग)
इससे खफा दिल्ली पुलिस ने जी न्यूज पर यह इंटरव्यू प्रसारित करने के चलते एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बताया कि चैनल ने पीड़ित की पहचान जाहिर की है। दुष्कर्म समेत कुछ अन्य मामलों में ऐसा करने की कानूनी मनाही है, इसलिए चैनल के खिलाफ आईपीसी की धारा 228ए के तहत केस दर्ज किया जाएगा।
भले ही पुलिस के इस कदम की आलोचना हो रही हो, लेकिन अगर कानूनी नजरिए से देखा जाए तो कानून इसकी इजाजत नहीं देता।
दरअसल, बलात्कार की शिकार लड़की या महिला का नाम प्रचारित-प्रकाशित करने और उसके नाम को ज्ञात बनाने से संबंधित कोई अन्य मामला आईपीसी की धारा 228 ए के तहत अपराध है। आईपीसी की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376जी के तहत केस की पीडिता का नाम प्रिंट या पब्लिश करने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। कानून के तहत बलात्कार पीडि़ता के निवास, परिजनों, दोस्तों, विश्वविद्यालय या उससे जुड़े अन्य विवरण को भी उजागर नहीं किया जा सकता। ऐसे में बलात्कार पीडि़ता का नाम सार्वजनिक करने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है।
इससे पहले केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री शशि थरूर ने उसका नाम सार्वजनिक करने की मांग कर दी थी। इसके बाद रेप पीडि़ता की पहचान उजागर किए जाने संबंधी मुद्दे पर बहस छिड़ गई।
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