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आईपीएस अफसरों के स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल होंगे

इंद्र वशिष्ठ | Dec 29, 2012, 06:42AM IST

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस में आने वाले दिनों में आईपीएस अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादले और पदोन्नति तय है। इनमें सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच से जुड़ी डीसीपी छाया शर्मा भी हैं। 


दुष्कर्म पीडि़ता का बयान लेने गईं एसडीएम उषा चतुर्वेदी द्वारा छाया शर्मा पर दबाव और धमकाने का आरोप लगाए जाने के बाद वे विवादों में घिर गई हैं।


वैसे सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की प्रमुख बना दिए जाने से डीसीपी छाया शर्मा के दिल्ली में ही तैनात रहने की संभावना है। इसी तरह टै्रफिक पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त सत्येंद्र गर्ग के मिजोरम तबादले का आदेश गृह मंत्रालय ने सितंबर २०१२ को  दिया था।


गर्ग ने गृह मंत्रालय से कहा कि कुछ समय बाद वह स्पेशल कमिश्नर होने वाले हैं इसलिए उनका तबादले का आदेश रद्द कर दिया जाए, लेकिन गृह मंत्रालय ने उनके अनुरोध को खारिज कर उनसे कह दिया कि पहले २४ घंटे में मिजोरम में रिपोर्ट करिए, उसके बाद पदोन्नति होगी।


लेकिन इसके बाद गृह मंत्रालय में पुलिस कमिश्नर ने अफसरों की कमी और २६ जनवरी का हवाला देकर गर्ग के तबादले के आदेश पर अमल को ३१ जनवरी २०१३ तक रुकवा लिया। एक आईपीएस अफसर ने बताया कि गर्ग के मामले से खफा गृह मंत्रालय  ने फिलहाल डीपीसी करना टाल दिया।



डीपीसी में देरी से प्रभावित एक आईपीएस अफसर ने बताया कि गर्ग के तबादले पर रोक  से आईपीएस के १९९५ और १९९९ बैच के अफसरों की पदोन्नति का मामला भी फिलहाल लटक गया है।


नई दिल्ली जिले मेें तैनात केशव द्विवेदी, मध्य जिले में तैनात देवेश श्रीवास्तव, लाइसेंसिंग में तैनात मधुप तिवारी और स्पेशल ब्रांच में तैनात रवींद्र यादव आईपीएस के १९९५ बैच के ये सभी अफसर इस समय अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर हैं। आईपीएस के १९९९ बैच में दक्षिण जिले की पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा और उनके पति विवेक किशोर हैं। इन दोनों के मिजोरम तबादले के आदेश काफी समय पहले गृह मंत्रालय दे चुका है।


लेकिन उसके अमल पर 31 दिसंबर 2012 तक रोक लगवाने में ये भी सफल हो गए। लेकिन विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक में हो रही देरी के कारण उपरोक्त इन 6 अफसरों  की पदोन्नति का मामला लटक रहा है। एक मंत्रालय में कई साल डेपुटेशन पूरी करने वाले 1990 बैच के आईपीएस दीपेंद्र पाठक का तबादला मिजोरम  किया गया था।


दीपेंद्र ने वहां पर ज्वाइन भी किया लेकिन मिजोरम सरकार ने वैकेंसी न होने का तर्क  देकर दीपेंद्र को वापस भेज दिया। दीपेंद्र अब गृह मंत्रालय से अपनी अगली पोस्टिंग के इंतजार में हैं।


दिल्ली में जमे रहने की कोशिश में लगे अफसर गृह मंत्रालय के काडर मैनेजमेंट को खराब ठहराते हुए तर्क देते हैं कि दिल्ली में खाली पड़े पदों को पहले भरने के बाद ही अफसरों को बाहर भेजा जाना चाहिए। दूसरी ओर एक अन्य अफसर ने बताया कि अफसरों के तबादले की एक नीति है।


नीति के अनुसार तबादले की व्यवस्था में गड़बड़ वह अफसर पैदा कर देते है जो अपने आका अफसर या नेता के दम पर दिल्ली में जमे रहना चाहते हैं।


6 जिलों में नहीं उपलब्ध हैं डीसीपी स्तर के अधिकारी:


दिल्ली में इस समय 11 पुलिस जिलों में से 6 जिलों में डीसीपी स्तर के अफसर उपलब्ध न होने के कारण अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अफसर  तैनात है।


इसी तरह स्पेशल कमिश्नर के कुल 10 पदों में से 3 पद खाली है। दिल्लीआम्र्ड पुलिस के स्पेशल कमिश्नर डॉ. आदित्य आर्य का तबादला बुधवार को दिल्ली होमगार्ड के डीजी पद पर हो जाने से अब स्पेशल कमिश्नर के 4 पद खाली हो गए है।


अपराध शाखा के स्पेशल कमिश्नर रंजीत नारायण 15 जनवरी को वीआरएस ले लेंगे और फरवरी में ट्रैफिक के स्पेशल कमिश्नर सुधीर यादव अंडमान चले जाएंगे।

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