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गीतिका से बातचीत के लिए तीन मोबाइल का इस्तेमाल करता था कांडा!
Bhaskar News Network
| Aug 26, 2012, 01:18AM IST

दिल्ली पुलिस ने अदालत में मुख्य रूप से चार तर्क रखते हुए सात दिन की रिमांड की मांग की थी। एसीएमएम देवेंद्र कुमार जांगला ने सुनवाई के बाद कहा कि कांडा कि रिमांड अवधि बढ़ाने के लिए पुलिस द्वारा दिए तर्को से मैं संतुष्ट हूं। लिहाजा दिल्ली पुलिस को जांच के लिए कांडा की तीन दिन की अतिरिक्त कस्टडी दी जाती है।
पुलिस पक्ष की दलील
सरकारी वकील राजीव मोहन ने दलील दी कि कांडा ने बीते कुछ समय में गीतिका से बातचीत के लिए तीन मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। गीतिका के मोबाइल को मिलाकर कुल चार मोबाइल की डिटेल की जांच होनी है, लेकिन मोबाइल कंपनियों से सिर्फ एक ही साल तक का कॉल डिटेल रिकॉर्ड उपलब्ध हो पाई है।
एफएसएल की मदद से कांडा और गीतिका के बीच में हुए मैसेज का कंटेंट भी बरामद करने का प्रयास कर रही है। साथ ही इन कंटेंट को ऑडियो/विजुअल क्लिपिंग बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है। कांडा के घर से बरामद जो कंप्यूटर बरामद किया गया, उसकी हार्ड हार्ड डिस्क को अलग किया गया था। आशंका है कि सबूतों को नष्ट करने के लिए ही ऐसा किया गया था।
इसके अलावा कांडा ने दुबई जाकर गीतिका पर वापस एमडीएलआर ज्वाइन करने का दबाव बनाया था। इस संदर्भ में दुबई गए तीन लोगों में से सिर्फ एक के पासपोर्ट ही कांडा की निशानदेही पर बरामद हो पाई हैं जबकि दो पासपोर्ट की बुकलेट उपलब्ध कराने में परिजन और कंपनी के अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।
बचाव पक्ष की सफाई
बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने अदालत में कहा, पुलिस ऐसे पहलुओं पर जांच कर रही है जिसका मुकदमे से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। आत्महत्या के लिए उकसाने का जो केस पुलिस ने दर्ज किया है असल में वह बनता ही नहीं है।
कुछ वर्षो पहले दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मनचंदा के आत्महत्या मामले का जिक्र करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि मनचंदा दो साल तक तत्कालीन कमिश्नर केके पॉल द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित होते रहे। उन्होंने यह बात अपने सुसाइड नोट में भी लिखी थी, लेकिन इस बाबत कोई केस दर्ज नहीं किया गया। पुलिस कांडा को बिना वजह लॉकअप में टार्चर कर रही है।
पूछताछ के लिए केस डायरी मेनटेन करने का आदेश
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस कस्टडी में मौजूद कांडा से पूछताछ के लिए पुलिस केस डायरी मेनटेन नहीं कर रही है। जांच अधिकारी के अलावा अन्य किसी भी अफसर को उससे पूछताछ की इजाजत नहीं होनी चाहिए। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि डीसीपी, एसीपी व अन्य आला अधिकारी आईओ के सीनियर अफसर हैं, जिन पर मामले की सही जांच कराने की जिम्मेदारी हैं।
वह कुछ समय के लिए खुद जांच अधिकारी बनकर ही आरोपी से पूछताछ करते हैं। इस पर एसीएमएम देवेंद्र कुमार जांगला ने पुलिस को आदेश किया कि वह कांडा से पूछताछ करने वाले अफसरों की केस डायरी बनाए। जिसमें पूछताछ करने वाले अफसरों के नाम केस डायरी में दर्ज करें।








