मध्यम वर्गीय परिवार में बच्चे सिर्फ मां-बाप के प्यारे-दुलारे ही नहीं होते। बच्चों के साथ उस परिवार के सपनें, उनकी उम्मीदें और अरमान भी जुड़े होते हैं। ऐसे ही एक मध्यमवर्गीय परिवार में 23 साल पहले उस लड़की का जन्म हुआ जिसकी मौत पर पूरा देश मातम मना रहा है।
उत्तर-प्रदेश के बलिया से उसका परिवार कोई 25 साल पहले दिल्ली आया। इसी परिवार में 23 साल पहले एक कन्या का जन्म हुआ। उसके बाद उस परिवार में दो लड़कों का भी आगमन हुआ, पर इन तीन संतानों में बिटिया सबसे बड़ी थी।
बिटिया पर परिवार के सपनों को पंख लगाने की जिम्मेदारी थी। बिटिया थी भी मेधावी। पढ़ने में होशियार। परिवार को लगने लगा था कि बड़ी होकर वो कायापलट करेगी। अभाव और संघर्ष के दौर से परिवार को उबारेगी।
पिता ने उसे पढ़ाने के लिए कर्ज तक लिया। बिटिया ने भी कोई कसर न छोड़ी। खुद पढ़ती रही और ट्यूशन पढ़ा कर अपनी फीस भी निकालती रही।
23 साल तक जिस सपने को मां-बाप ने संजोया और संवारा अब उसके पूरा होने का वक़्त आ चुका था। बिटिया की पढ़ाई पूरी हो गई थी। देहरादून से फिजियोथिरेपी का कोर्स कर वह वापस दिल्ली आई थी और एक अस्पताल में इंटर्नशिप कर रही थी।