नई दिल्ली. केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं का उत्पीडऩ कई तरह से होता है। महिला आयोग को मिलने वाली शिकायतें 40 से ज्यादा कैटेगरी में बांटी गई हैं।
इनमें गैंग रेप, रेप, व्यभिचार, पुलिसिया उत्पीडऩ के अलावा अपनों से ही होने वाला उत्पीडऩ भी शामिल है। महिला आयोग को इस साल 5 दिसंबर 2012 तक की अवधि में रेप से जुड़ी 565 शिकायतें मिली हैं। वर्ष 2011 में 611 शिकायतें आयोग को मिली थीं।
ऐसे होता है उत्पीडऩ :
एसिड अटैक। व्यभिचार। हत्या का प्रयास। बलात्कार का प्रयास। पहली पत्नी होते हुए दूसरी शादी करना। जाति-समुदाय आधारित हिंसा। कथित सम्मान के लिए अपराध। ऑनर किलिंग। ससुराल पक्ष से उत्पीडऩ की शिकायतें। दंगे सांप्रदायिक हिंसा में महिला उत्पीडऩ। साइबर क्राइम। डायन प्रथा व चुड़ैल का संदेह। संपत्ति संबंधी अधिकारों का हनन। पति द्वारा छोड़ दिया जाना।
तलाक में विवाद। घरेलू हिंसा, दहेज हत्या या दहेज के लिए प्रताडऩा। कामकाज के स्थल पर उत्पीड़न। विधवाओं का उत्पीडऩ। महिलाओं व बच्चों का अनैतिक देह व्यापार। महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व न दिया जाना। अपहरण या बहला फुसलाकर भगाना। लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी शिकायतें। मेंटनेंस क्लेम।
छेड़छाड़ से जुड़ी शिकायतें। ईव टीजिंग, नान पेमेंट ऑफ मेंटनेंस, पुलिस की लापरवाही से जुड़ी शिकायत। पुलिसिया उत्पीडऩ। शादी के पहले धोखा।
प्रापर्टी विवाद । रेप, गैंग रेप, शादीशुदा के साथ रेप। सेक्स संबंधी अपराध।
पीडि़तों का पुनर्वास। टोना प्रथा, काला जादू। महिलाओं को अधिकार से वंचित करना।