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नाबालिग को जिंदा जला देना चाहती थी 'दामिनी'

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नई दिल्ली. दिल्ली दुष्कर्म मामले के सबसे बर्बर आरोपी को नाबालिग करार दिए जाने के बाद से दामिनी के परिवार में एक बार फिर दुख फैल गया है। दामिनी के पिता गहरे दुख के साथ कहते हैं कि गांव में बच्‍चे देरी से स्‍कूल जाते हैं। वैसे भी स्‍कूल में प्रवेश के दौरान जानबूझ कर कम उम्र लिखवाई जाती है। ऐसे में मेरी बेटी के नाबालिग हत्‍यारे की हड्डी जांच के द्वारा उम्र का पता लगाने की मांग करता हूं। वह कहते हैं कि यदि फिर भी वह नाबालिग निकलता है तो उसे ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि लोग ऐसे अपराध करने से  पहले दस बार सोचे हैं। नाबालिग बलात्‍कारी को जिंदा जलाकर मार देना चाहिए। मेरी बेटी की भी यही इच्‍छा थी।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी के स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को सही माना है। साथ ही आरोपी की बोन टेस्ट कराने की मांग भी खारिज कर दी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस केस की दिल्ली से बाहर सुननाई की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। 

अब दिल्ली पुलिस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी। स्कूल सर्टिफिकेट में आरोपी की जन्म तिथि 4 जून 1995 दर्ज है। इस तरह अपराध के वक्त (16 दिसंबर 2012) उसकी उम्र 17 साल 6 माह 12 दिन थी। 15 जनवरी को सुनवाई के दौरान आरोपी ने जिस स्कूल से पढ़ाई की थी उसके हेडमास्टर बोर्ड के सामने पेश हुए थे। हेडमास्टर ने स्कूल रजिस्टर की फोटो कॉपी पेश की थी। आरोपी की उम्र साबित करने का सिर्फ यही एक दस्तावेज मौजूद है और इसी आधार पर जुवेनाइल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

सच यह है कि एक दशक में बाल अपराधियों द्वारा किए गए अपराधों में तेजी आई है। वर्ष 2000 में जहां नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या 198 थीं, वही 2011 में 1149 हो गई। यानी पांच गुना। विशेषज्ञों की नजर में कम सजा से भी इनका हौसला बढ़ता है। 

अब क्या रास्ता :

हाईकोर्ट बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट की इजाजत दे सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्ट से उम्र की सही जानकारी नहीं मिलती। दो साल कम या ज्यादे की संभावना बनी रहती है।

ऐसी होगी आगे की प्रक्रिया?

  • इस आरोपी ने किन वजहों से अपराध किया, यह जांच एक काउंसलर करेगा।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट में अन्य 5 आरोपियों के साथ इसकी सुनवाई नहीं होगी।
  • दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल तक की सजा हो सकती है।
  • इसका केस गंभीर था, लिहाजा इसे सजा अवधि के दौरान किसी सुरक्षित जगह पर भी रखा जा सकता है।

दरिंदगी की पराकाष्ठा और कानून की खामी :

  • 16 दिसंबर की रात चलती बस में छात्रा के साथ सबसे ज्यादा दरिंदगी इसी आरोपी ने की थी।
  • इसी ने उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया था।
  • इसी ने उसकी आंत पर सरिये से वार किया था। जो पीडि़ता की मौत की सबसे बड़ी वजह बनी।
  • इसी आरोपी ने उसे चलती बस से फेंकने की सलाह भी अपने बाकी साथियों को दी थी।

(दिल्ली पुलिस के मुताबिक)

 

आप क्या सोचते हैं?

  • क्या ऐसे विकृत मुजरिम को महज कुछ महीनों की सजा मिलना ठीक होगी?
  • क्या कम सजा से वह आगे चलकर खतरनाक अपराधी नहीं बन जाएगा?
  • अपराधी की उम्र के बजाय क्या अपराध की गंभीरता सजा के लिए आधार नहीं होना चाहिए?
  • अपने सुझाव नाम और पते के साथ 9223177890 नंबर पर एसएमएस कीजिए या यहां कमेंट बॉक्‍स में टाइप कर सबमिट कीजिए। 

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