यमुना की सफाई की रूपरेखा तैयार करें दो आईआईटी

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और रूड़की स्थित आईआईटी के निदेशकों से कहा कि वे यमुना नदी की सफाई के लिए एक नई परियोजना तैयार करें।
कोर्ट ने कहा कि यमुना की सफाई की वर्तमान परियोजना पर दो दशकों में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार और जस्टिस मदन बी. लोकूर की बेंच ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव को आईआईटी निदेशकों के साथ सभी संबंधित प्राधिकरणों की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है ताकि नई परियोजना पर विचार-विमर्श किया जा सके।
कोर्ट ने कहा कि डीडीए, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड, उपराज्यपाल के प्रतिनिधि, हरियाणा के मुख्य सचिव और यमुना सफाई के मामले में कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त वकील को इस बैठक में मौजूद रहना होगा। बैठक 12 जनवरी को होगी और परियोजना की रूपरेखा 8 फरवरी से पहले कोर्ट में पेश की जाएगी।






