पहले सीसीटीवी कैमरों को छत की ओर घुमाया, फिर लगा दी आग
गुडग़ांव. मानेसर के मारुति-सुजुकी प्लांट में 18 जुलाई को श्रमिकों और प्रबंधन के बीच हुई हिंसक झड़प एक सोची-समझी साजिश का परिणाम थी। हिंसा-आगजनी से पहले प्लांट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का मुंह छत की ओर घुमा दिया गया। डोर फ्रेम बार (लोहे की छड़) हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए पहले ही निकाल ली गई थी। पुलिस जांच में अब तक पाए गए कई तथ्य साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी शुक्रवार को दी। उन्होंने बताया कि जितने भी कैमरों का मुंह ऊपर की ओर घुमाया गया है, उन सभी में इन्हें घुमाने वाले का चेहरा भी कैद हो गया है। पुलिस इस युवक की पहचान करने में जुटी है। प्लांट परिसर में लगे अधिकांश कैमरों से पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है। सिर्फ दो कैमरे ऐसे मिले हैं जिनमें घटनाक्रम के कुछ फुटेज कैद हुए हैं। इनमें मारपीट करती मजदूरों की भीड़ दिखाई दे रही है।
44 के बयान दर्ज :
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मारुति हिंसा में कुल 93 लोग घायल हुए थे। विशेष जांच दल (एसआईटी) इन सभी के बयान लेने में जुटा है। इनमें से 44 के बयान शुक्रवार तक दर्ज कर लिए हैं।
क्या है मामला :
मानेसर प्लांट में एक साथी के निलंबन से नाराज श्रमिकों ने १८ जुलाई को प्लांट परिसर में हिंसा कर ऑफिस समेत कई जगहों पर आग लगा दी थी। इस घटना में जीएम (एचआर) अवनीश कुमार देव को जिंदा जला दिया गया था। कई अधिकारी घायल हुए थे। पुलिस अब तक इस मामले में ९७ श्रमिकों को गिरफ्तार कर चुकी है।
नुकसान का आकलन :
उधर, मारुति सुजुकी संयंत्र में हिंसा-आगजनी से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह अपने कर्मचारियों को लेकर फिक्रमंद है। क्योंकि मुख्य दोषी अभी तक पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। कंपनी संयंत्र खोलने की घोषणा तभी करेगी जब वह कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आशान्वित नहीं हो जाती।








