नई दिल्ली. राजधानी के तीनों नवगठित निगमों में महिला पार्षदों की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होगी, लेकिन 24 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां चार पार्षदों में से तीन महिला पार्षद होंगी। जबकि, 22 विधानसभा क्षेत्र ऐसे होंगे, जहां चार पार्षदों में से महज एक महिला पार्षद होगी।
खास बात यह भी है कि भले ही नए निगमों में महिला पार्षदों की संख्या ज्यादा हो जाए, लेकिन वर्तमान महिला पार्षद अपने टिकट को लेकर ज्यादा आशंकित दिख रही हैं।
इसका कारण यह माना जा रहा है कि राजधानी की दोनों मुख्य पार्टियां महिला पार्षदों के कामकाज के आधार पर टिकटों का वितरण करने की बात कह रही हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा निर्धारित किए गए निगम वाडरें के निर्धारण से ज्ञात होता है कि उत्तरी नगर निगम के 26 विधानसभा क्षेत्रों के 104 वाडरें में से 52 महिला पार्षद होंगी, लेकिन इनमें 10 विधानसभा क्षेत्रों में महिला पार्षदों का ही जलवा होगा, क्योंकि इनमें से प्रत्येक विधानसभा के चार वाडरें में से तीन वाडरें पर महिला पार्षद ही नजर आएंगी। खास बात यह है कि ये विधानसभा क्षेत्र उत्तरी दिल्ली निगम के शहरी क्षेत्र के अलावा पुनर्वास और ग्रामीण क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहे हैं।
इसी तरह, दक्षिणी निगम के 26 विधानसभा क्षेत्रों के 104 वाडरें में से 53 वाडरें में महिला पार्षदों को टिकट दिया जाएगा, लेकिन इनमें से आठ विधानसभा क्षेत्रों में तीन-तीन महिला उम्मीदवारों को उतारा जाएगा।
दक्षिण निगम में अधिकांश शहरी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, पूर्वी दिल्ली नगर निगम के 16 विधानसभा क्षेत्रों के 64 वाडरें में से 33 वाडरें में महिला पार्षद होंगी, लेकिन यहां पर केवल छह विधानसभा क्षेत्रों में ही तीन-तीन महिला पार्षद नजर आएंगी।
इससे पूर्वी दिल्ली की पुनर्वास व अनधिकृत कॉलोनियां ही मूलरूप से प्रभावित हो रही हैं, यानि तीनों निगमों के अंतर्गत आने वाले कुल 68 विधानसभा क्षेत्रों के 24 विधानसभा क्षेत्रों में 72 महिला पार्षद चुनी जाएंगी।
इसके अलावा, 22 विधानसभा क्षेत्रों में 44 महिला पार्षद (प्रत्येक विधानसभा में दो वार्ड महिला) नजर आएंगी। हालांकि, अन्य 22 विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी होंगे, जहां महिला पार्षदों की संख्या मात्र 22 रहेगी। इसका ज्यादा असर भी उत्तरी दिल्ली के नौ विधानसभा क्षेत्रों में दिखेगा। इसके अलावा, दक्षिणी दिल्ली के आठ विधानसभा क्षेत्रों और पूर्वी दिल्ली के पांच विधानसभा क्षेत्रों पर पड़ेगा।
साफ बोलने से कतरा रहे हैं नेता
उधर, अनेक वर्तमान महिला पार्षदों के वार्ड भी सामान्य अथवा एससी में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में ये महिला पार्षद अपने टिकट को लेकर आशंकित नजर आ रही हैं। इसका कारण यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों मुख्य पार्टियों के नेता फिलहाल इन पार्षदों को टिकट देने के मामले में खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
वैसे, भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी रामेश्वर चौरसिया का यह जरूर कहना है कि इस मामले पर चर्चा की जाएगी और जिस महिला पार्षद की छवि स्वच्छ होगी तथा जनता से जुड़ी होगी उसे टिकट दिया जाएगा।
उधर, निगम में विपक्ष के नेता और कांग्रेसी पार्षद जयकिशन शर्मा का कहना है कि इस मामले में जल्द ही पार्टी बैठक कर आगे की रणनीति बनाएगी। इसी तरह, कोहाट एनक्लेव वार्ड सामान्य होने की वजह से वहां की वर्तमान महिला पार्षद मीरा अग्रवाल अभी कुछ सीधा कहने से कतरा रही हैं।
उनका बस यह कहना है कि पार्टी जो फैसला करेगी, उसे स्वीकार किया जाएगा। इसी तरह, संगम विहार ईस्ट वार्ड भी अब सामान्य हो गया है और वहां की निगम पार्षद एवं स्थायी समिति की उपाध्यक्ष सरिता चौधरी भी पार्टी के फैसले पर ही चलने की बात कह रही हैं।
तीन-तीन महिला पार्षदों वाले विधानसभा क्षेत्र
1 नरेला 2 तिमारपुर 3 बादली 4 मुंडका 5 सुल्तानपुरी माजरा 6 मंगोलपुरी 7 वजीरपुर 8 सदर बाजार 9 बल्लीमारान 10 पटेल नगर 11 मादीपुर 12 द्वारका 13 नजफगढ़ 14 जंगपुरा 15 महरौली 16 देवली 17 कालकाजी 18 बदरपुर 19 त्रिलोकपुरी 20 पटपड़गंज 21 गांधी नगर 22 सीमापुरी 23 घोंडा 24 मुस्तफाबाद
एक महिला पार्षद वाले विधानसभा क्षेत्र
1 बुराड़ी 2 आदर्शनगर 3 बवाना 4 किराड़ी 5 नांगलोई जाट 6 त्रिनगर 7 मॉडल टाउन 8 मटियामहल 9 करोलबाग 10 विकासपुरी 11 मटियाला 12 बिजवासन 13 राजेन्द्र नगर 14 आरके पुरम 15 छतरपुर 16 अंबेडकरनगर 17 तुगलकाबाद 18 कोंडली 19 विश्वासनगर 20 शाहदरा 21 रोहताश नगर 22 गोकलपुर
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