अब 11 लाख का होगा ज्ञानपीठ पुरस्कार

नई दिल्ली।देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में दी जाने वाली राशि को सात लाख रुपए से बढ़ाकर 11 लाख रुपए कर दिया गया है।
ज्ञानपीठ के निदेशक रवींद्र कालिया ने कहा कि भारतीय भाषाओं के लिए दिया जाने वाला ज्ञानपीठ पुरस्कार अब संभवत: सबसे अधिक राशि का प्रतिष्ठित साहित्य पुरस्कार हो गया है। भारतीय ज्ञानपीठ की स्थापना वर्ष 1944 में हुई थी और 1965 में ज्ञानपीठ पुरस्कार की शुरुआत हुई थी।
प्रथम पुरस्कार गोविंद शंकर कुरूप की मलयालम कृति ‘ओटक्कुषल’ को दिया गया था, जिसकी पुरस्कार राशि एक लाख रुपए थी। पुरस्कार राशि बढ़ते-बढ़ते पांच लाख रुपए और सात लाख रुपए हो गई। 1982 के 18वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से यह सम्मान लेखक के संपूर्ण योगदान के लिए दिया जाने लगा।
ज्ञानपीठ पुरस्कार से अब तक हिंदी के नौ, कन्नड़ के 8, बांग्ला व मलयालम के पांच, उर्दू के चार, गुजराती, मराठी व ओड़िया के तीन-तीन, असमिया, तमिल, पंजाबी एवं तेलुगु के 2-2 तथा संस्कृत, कश्मीरी व कोंकणी के एक-एक लेखक को पुरस्कृत किया गया है।








