संसद की स्थायी समिति ने ली दिल्ली पुलिस की क्लास
नई दिल्ली. गृह मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की जमकर क्लास ली। वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में गुरुवार की बैठक भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, राजीव प्रताप रूडी, कांग्रेस से संदीप दीक्षित, नवीन जिंदल, रवनीत बिट्टू, सपा से शफीकुर रहमान और बसपा से सतीशचंद्र मिश्रा वगैरह मौजूद थे।
सभी सदस्यों ने दिल्ली पुलिस से उस दिन की घटना का ब्यौरा मांगा, उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और दिल्ली में पुलिस व्यवस्था को चुस्त करने के लिए सुझाव दिए। समिति की अगली बैठक 4 जनवरी को होगी।
गुरुवार की बैठक में सबसे पहले लालकृष्ण आडवाणी ने गृह सचिव आरके सिंह नहीं पहुंचने की वजह जाननी चाही।
समिति ने उन्हें तलब किया था लेकिन वे व्यस्तता के चलते नहीं पहुंचे थे। उसके बाद आडवाणी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार से यह जानना चाहा कि दो थानों के बीच के इलाके पर पुलिस का नजरिया है क्योंकि अपराध होने के बाद पुलिस सबसे पहले सीमा विवाद में उलझती है और दक्षिण दिल्ली की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दौरान भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने कमिश्नर से पूछा कि उस घटना की पीसीआर कॉल कब मिली और कब कार्रवाई
शुरू हुई।
कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त तादाद में भर्ती होनी चाहिए। जिंदल ने दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करने का सुझाव भी दिया। भाजपा के राजीव प्रताप रूडी ने दिल्ली पुलिस में ऊंचे पदों पर रिक्तियां भरने का सुझाव दिया।
बसपा के सतीशचंद्र मिश्रा ने दिल्ली पुलिस में दो साल से अधिक समय तक मौजूद दानिक्स सेवा के अफसरों के तुरंत तबादले का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस का ज्यादा ध्यान चमकदमक पर होता है न कि लोगों की सुरक्षा पर।
कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित ने कहा कि पुलिस के बड़े अधिकारियों और थाने के एसएचओ के बीच कोई तालमेल ही नहीं रहता है, इससे उन्हें सही वक्त पर सही निर्देश नहीं पहुंच पाते हैं। तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष ने पूछा कि दिल्ली के अलावा देश भर में कई बलात्कार के मामे बढ़ रहे हैं, गृह मंत्रालय इस विषय में क्या कड़े कदम उठा रहा है।
कांग्रेस के रवनीत बिट्टू ने दिल्ली पुलिस से कहा कि दिल्ली में कई सूबों से लोग आते हैं और उनमें असुरक्षा की भावना ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर पुलिस बैरिकेडिंग की व्यवस्था बिल्कुल लचर है और दिल्ली में अपराध करके दूसरे राज्यों में भागना आसान हो जाता है।
समिति की अगली बैठक चार जनवरी को है जिसमें गृह सचिव के साथ कानून मंत्रालय के सचिव को भी तलब किया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कई मामलों के लिए गृह मंत्रालय को जिम्मेदारी बताया जबकि गृह मंत्रालय की तरफ से जवाब देने के लिए संयुक्त सचिव ही उपलब्ध थे। स्थाई समिति ने दिल्ली पुलिस को यह हिदायत दी है कि वह दिल्ली की सुरक्षा में लापरवाही न बरते।
अगर ऐसा होता है स्थाई समिति की अनुशंसा में इस बात को शामिल किया जाएगा कि पुलिस अफसर अपने मातहत को निर्देश देने में हमेशा नाकाम रहती है और इसीलिए महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। समिति ने दिल्ली पुलिस के प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को भी अनुचित माना।






