कलाम को राष्ट्रपति नहीं बनाना चाहते थे अटल बिहारी

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने दावा किया है कि अटल बिहारी वाजपेयी 1998 में उन्हें अपनी सरकार में बतौर मंत्री शामिल करना चाहते थे। कलाम ने अग्नि और पोकरण परियोजना के कारण यह पेशकश ठुकरा दी थी।
कलाम ने अपनी किताब नई किताब ‘टर्निग पॉइंट्स अ जर्नी चैलेंजेज’ में इसका जिक्र किया है। कलाम उस वक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख थे। वे वर्ष 2002 में राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए।
किताब के मुताबिक, ‘कलाम को 15 मार्च 1998 की रात अटल बिहारी वाजपेयी का फोन आया। उन्होंने कैबिनेट में शामिल होने की पेशकश की। इस पर उन्होंने सोचने के लिए कुछ वक्त मांगा। वाजपेयी ने अगली सुबह नौ बजे मिलने को कहा।
दोस्तों ने मना किया था
वाजपेयी ने सुबह तीन बजे तक दोस्तों से इस पेशकश पर बातचीत की। दोस्तों का कहना था कि वह राष्ट्रीय महत्व के दो अहम परियोजनाओं से जुड़े हैं। दोनों प्रोजेक्ट एडवांस स्टेज में हैं। राजनीति में आने के लिए इन परियोजनाओं को छोड़ना सही नहीं होगा।
कलाम अगली सुबह सात रोडकोर्स रोड पहुंचे। उन्होंने वाजपेयी से कहा कि अग्नि मिसाइल सिस्टम और परमाणु परीक्षण से जुड़ी दो परियोजनाएं देश के लिए ज्यादा जरूरी है। उन्होंने इसमें बने रहने की इजाजत मांगी। वाजपेयी ने इस पर कलाम की तारीफ की और अपना काम जारी रखने को कहा।
किताब में कलाम ने लिखा है कि कुछ महीनों बाद भारत ने लगातार पांच परमाणु परीक्षण किए। कलाम को 1999 में केंद्र सरकार का प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार बनाया गया। यह पद कैबिनेट मंत्री के बराबर का था। नवंबर 2001 तक वह इस पद पर थे।
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