नई दिल्ली. एक और जहां पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड से जूझ रहा है वहीं दिल्ली में पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए। सोमवार सुबह 04:30 बजे दिल्ली में पारा 1 डिग्री पहुंच गया। वहीं उत्तर प्रदेश में ठंड से अब तक 155 लोगों की जान जा चुकी है।
हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड की वजह से राजधानी दिल्ली सहित पूरा एनसीआर रविवार को भी दिन भर ठिठुरते रहे। रविवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था, जो इस वर्ष अब तक सबसे न्यूनतम तापमान है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 2008 में 2, 3, 24 तथा 28 जनवरी को राजधानी का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया था। पांच साल बाद एक बार फिर न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस के नीचे चला गया है।
यही वजह है कि दिल्ली वालों को इस वर्ष लगातार शीतलहर का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सोमवार को भी सर्दी का आलम कुछ इसी प्रकार रहेगा और अधिकतम तापमान 14 तथा न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।
सोमवार की सुबह हल्का कोहरा छाया रहेगा और दिन भर आसमान साफ रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि राजधानी अभी कोहरे की चपेट में नहीं है। रविवार को अधिकतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सामान्य से 9 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 5 डिग्री कम है। इस कड़ाके की ठंड में रविवार को कोटला मैदान में भारत-पाकिस्तान का तीसरा वनडे हुआ (जिसके फिक्स होने की भी आशंका जताई जा रही है)। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड ही है। इतने कम तापमान में दिल्ली में शायद ही कभी भारत-पाकिस्तान का कोई मैच हुआ हो। इन दो देशों के आमने-सामने होने के चलते ही कड़ाके की ठंड में भी कोटला का मैदान दर्शकों से खचाखच भरा था।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अभी हर दिन राजधानी में औसत तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गिर रहा है, जिसकी वजह से लोग शीतलहर की चपेट में हैं। अगले कुछ दिन मौसम का यह रुख बरकरार रहेगा।
बुजुर्गों के लिए बढ़ी परेशानी :
मैक्स अस्पताल के डॉक्टर संदीप बुद्धिराजा के अनुसार ठंड की वजह से बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ जाती है। खासकर दिल का दौरा पडऩे की आशंका बढ़ जाती है क्योंकि ठंड की वजह से नसें सिकुड़ जाती हैं और शरीर के प्रमुख अंगों को पर्याप्त खून की आपूर्ति नहीं हो पाती है, इसलिए हार्ट के मरीजों को इन दिनों ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। दमे व अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत आती है।
हाइपरटेंशन के मरीजों के बीपी में उतार-चढ़ाव होता है। यही नहीं बुजुर्गों के इन दिनों हाइपोथरमिया के शिकार होने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और सर्दी की वजह से अगर उनके शरीर का तापमान 37 डिग्री से नीचे आ जाता है तो मरीज कोमा में भी जा सकता है।
सर्दी से बचाएं बच्चों को :
चांदनी चौक स्थित मारवाड़ी चैरिटेबल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रमेश बंसल ने कहा कि इन दिनों नवजात शिशु के साथ-साथ 8 से 10 साल के बच्चे निमोनिया, सर्दी और जुकाम की समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टर का कहना है कि माता-पिता को हमेशा इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि बच्चे को कहीं ठंड तो नहीं लग रही है, जो गर्म कपड़े पहनाए गए हैं वह पर्याप्त हैं या नहीं इसका ध्यान रखें।
उन्होंने कहा कि सर्दी का मौसम बीमारी का मौसम नहीं है, लेकिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है इसलिए वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं।
यही डॉक्टर ने कहा कि जिन बच्चों को सर्दी या जुकाम हो जाए तो उसे स्कूल नहीं भेजे, क्योंकि वहां उस का संक्रमण दूसरे बच्चों को भी प्रभावित करेगा।