मां-बाप पर चलेगा बेटी की हत्या का केस
गाजियाबाद. बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में नोएडा के डेंटिस्ट दंपती डॉ. राजेश और नूपुर तलवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने आरुषि के माता-पिता नूपुर व राजेश तलवार पर औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। मामले की अगली सुनवाई चार जून को होगी।
गुरुवार को सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस. लाल ने गुरुवार को ही नूपुर व राजेश तलवार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302/34 और 201/34 के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए थे। राजेश तलवार को आईपीसी की धारा 203/34 (समान इरादे से अपराध के बारे में पुलिस को गुमराह करने) के तहत आरोपित करने के भी आदेश दिए गए थे।
तलवार दंपती के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने सीबीआई की विशेष अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बनाई है।
तलवार दंपती पर हत्या के अलावा जांच एजेंसियों व कोर्ट को गुमराह करने, सबूत छिपाने और इन्हें नष्ट करने के आरोप में मुकदमा चलेगा। यदि आरोप सही पाए गए तो उन्हें फांसी तक हो सकती है।
'बेटी-नौकर को मार डाला'
अदालत में सीबीआई के वकील आर के सैनी ने तर्क दिया कि तलवार दंपती ने ही अपनी बेटी आरुषि का कत्ल किया है। इसके बाद उन्होंने घरेलू नौकर हेमराज को भी मार दिया। फिर मौका-ए-वारदात से सबूत नष्ट किए।
सैनी ने दलील दी कि आरुषि और हेमराज को अपनी बेटी के बेडरूम में डॉ. राजेश और नूपुर ने आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। इससे राजेश ने आपा खो दिया। सैनी के मुताबिक डॉ. राजेश ने पहले गोल्फ स्टिक से आरुषि-हेमराज की पिटाई की। जब दोनों बेहोश हो गए तो सर्जिकल ब्लेड से उनका गला काट दिया।
दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकील ने सीबीआई के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनके मुताबिक आरोपों की पुष्टि के लिए सीबीआई के पास कोई सबूत नहीं हैं। आरुषि-हेमराज की हत्या 15-16 मई 2008 को हुई थी।






