नई दिल्ली. दिल्ली में
चलती बस में गैंगरेप के खिलाफ हुई 'युवा क्रांति' रविवार को हिंसक हो गई और सोमवार को आंदोलन की धार भी कुंद पड़ गई। शनिवार और रविवार को हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर उतर गए थे। फिर यह आंदोलन कैसे हिंसक हो गया, यह बड़ा सवाल है। सरकार ने आंदोलनकारियों पर सख्ती की और अब इसकी जांच कराने का ऐलान भी हो गया है। आज आंदोलन कुंद भले ही हो गया है, पर यह कई सबक दे गया है।
1. सोशल साइट्स से नहीं सफल हो सकता कोई आंदोलन
फेसबुक पर ‘हैंग द रेपिस्ट’ नाम से एक पेज बनाया गया और लोगों से 22 दिसंबर को इंडिया गेट पर जुटने का आह्वान किया गया। फेसबुक और एसएमएस के जरिए किए गए आह्वान पर राजपथ पर कुछ युवा जुटे। उनके बीच वे लोग भी शामिल हो गए जो वीकेंड पर इंडिया गेट घूमने आए थे। इस तरह उनकी तादाद अच्छी-खासी हो गई। मीडिया ने भी उनके आंदोलन का अच्छा कवरेज किया। ऐसे में भीड़ और युवाओं का उत्साह बढ़ता गया। लेकिन आंदोलन करने वाले संगठित नहीं थे। 'फेसबुक फ्रेंड्स' की अपील पर जुटे युवा वहां भी गुट तक ही सीमित रह गए और आंदोलन दिशाहीन हो गया।
रविवार को इंडिया गेट पर हुए युवाओं के प्रदर्शन और उसके बाद हुए बर्बर लाठीचार्ज की एक बड़ी वजह भी यह रही कि असंगठित युवाओं के प्रदर्शन में जिसने जो चाहा, किया। कई युवा तोड़फोड़, मारपीट, पत्थरबाजी पर उतर गए। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। सो, पुलिस ने उन पर जबरदस्त सख्ती की। (
देखें रविवार के प्रदर्शन की 125 तस्वीरें)