नियमों का मजाक उड़ाते हुए पूरी दिल्ली में दौड़ती हैं इस तरह की गाडियां!

नई दिल्ली. पुलिस के आशीर्वाद और मिलीभगत से राजधानी में हजारों चार्टर्ड या स्टेज कैरिज बसें दौड़ रही हैं जो सुबह-शाम स्टेज कैरिज के अलावा दिन के बाकी समय में सवारी उठाते हुए सार्वजनिक परिवहन के तौर पर भी चलती हैं। पुलिस के आला अधिकारी भी मानते हैं कि अगर ट्रैफिक पुलिस न चाहे तो ऐसी एक भी बस नहीं चल सकती है।
ऐसी बस सवारी परमिट के बिना, नियमों का मजाक उड़ाते हुए पूरी दिल्ली में सवारी उठाती है। नियमों के मुताबिक हर बस में ट्रेंड लाइसेंस धारक कंडक्टर होना चाहिए। उसके पास प्राथमिक चिकित्सा कोर्स का प्रमाणपत्र होना चाहिए।
संबंधित बस संचालक को नजदीकी यातायात पुलिस कार्यालय के साथ अपने स्टाफ का डाटा साझा करना चाहिए। लेकिन इन नियमों के पालन की जगह सस्ती पब्लिसिटी के लिए यातायात पुलिस का ध्यान पिछले दो साल से मात्र सितारों से रेड लाइट पर गुलाब बंटवाने या फिर दुपहिया चालकों को किसी फिल्म स्टार से हेलमेट बंधवाना ही रह गया है।
जबकि बदरपुर के नजदीक जैतपुर मोड़, पीरागढ़ी लालबत्ती, उत्तम नगर चौक, लाल किला सहित दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां यातायात पुलिस के आशीर्वाद से न केवल ऐसी बसें चल रही हैं बल्कि ग्रामीण सेवा और तिपहिया भी दौड़ रहे हैं और उनसे यातायात जाम भी हो रहा है।
महज 36 कैमरों के भरोसे ट्रैफिक सिग्नल :
राजधानी की सड़कों पर भले ही आए दिन गैंगरेप, छेड़छाड़, लूटपाट और झपटमारी जैसी वारदातें होती रहती हों, लेकिन ट्रैफिक सिग्नल पर निगरानी के लिए केवल 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
यातायात पुलिस के विशेष आयुक्त सुधीर यादव ने बताया कि इन कैमरों को राजधानी के विभिन्न महत्वपूर्ण मार्गों पर लगाया गया है।
हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह कैमरे केवल यातायात पुलिस द्वारा लगाए गए हैं। जिला पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से विभिन्न मार्केट व महत्वपूर्ण स्थानों पर अलग से सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था की है।
पुलिस के मुताबिक चलते वाहनों में बढ़ती वारदातों को देखते हुए जल्द ही अन्य मार्गों को भी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के दायरे में लाने की कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली गैंग रेप को लेकर जहां पूरे देश में बवाल मचा हुआ है, वहीं Dainikbhaskar.com भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत ऐसे अपराधों के खिलाफ अभियान चला आपकी आवाज बुलंद करने में लगा है। घटना के पहले दिन से ही हम अपने अभियान ''ब्लैक आउट इमेज'' (दिल्ली में रविवार रात चलती बस में हुए सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता के समर्थन में) से ऐसी घटनाओं का सख्त विरोध कर रहे हैं।






