काले शीशे वाली कार के चालकों पर गिरेगी गाज, गृहमंत्री ने कहा-तेज होगा अभियान

मुंबई. महिलाओं के खिलाफ गैंग रेप के बढ़ते अपराधों के मद्देनजर राज्य गृह विभाग काले रंग के शीशे वाली कारों के खिलाफ अभियान में तेजी लाएगा।
इसके तहत जिन कारों के शीशों पर काले रंग या गहरे रंग की फिल्म चढ़ी होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में वो कारें शामिल नहीं होंगी जिन्हें सरकार से अनुमति मिली हुई है। गृहमंत्री आरआर पाटील ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नवनिर्मित दफ्तर में मीडिया से बातचीत के दौरान गृहमंत्री ने बताया कि चलती कार में दुष्कर्म जैसी घटनाओं के चलते केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने शीशों पर काली या गहरे रंग की फिल्म चढ़ाने पर रोक लगाई है।
इसके बावजूद लोग उस पर अमल नहीं कर रहे। ऐसे लोगों के खिलाफ राज्य में विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
गृहमंत्री ने लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों को सरकार से सुरक्षा मिली हुई है, सिर्फ वही कार के शीशों पर फिल्म चढ़ा सकेंगे।
अनदेखी पर होगी जांच : गृहमंत्री ने छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जो पुलिस अधिकारी पीडि़त महिला की शिकायत की अनदेखी करेगा, उसकी जांच कराई जाएगी।
गृह विभाग की तरफ से पुलिस महकमे में निर्देश दिए गए हैं कि महिलाओं से छेड़छाड़ मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
60 दिन में पूरी हो जांच : वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुलिस स्टेशन में अपने दौरे के समय महिलाओं से संबंधित प्रकरणों की गहराई से जानकारी लें और जांच में तेजी लाने के प्रयास करें।
हम चाहते हैं कि ऐसे मामलों की 60 दिनों में जांच पूरी हो, 90 दिन में चार्जशीट और तीन महीने के भीतर अदालत में उसकी सुनवाई शुरू हो जाए।
नाशिक और मानखुर्द की घटनाओं के मद्देनजर गुरुवार की सुबह पुलिस मुख्यालय पर गृहमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी, जिसमें राज्य के सभी आला पुलिस अधिकारी शामिल हुए थे।
पुलिस के लिए कार्यशाला : गृहमंत्री ने बताया कि महिलाओं से संबंधित अपराधों में इस्तेमाल होने वाले सभी कानूनों की जानकारी पुलिस अधिकारियों को नहीं है।
इसके लिए आने वाले पंद्रह दिनों में कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें पुलिस अधिकारियों उन तमाम कानूनों से अवगत कराया जाएगा, जो महिलाओं के खिलाफ अपराध में इस्तेमाल हो सकते हैं।










