नई दिल्ली. इमरजेंसी मरीजों के लिए पूरे विश्व में एंबुलेंस जान बचाने के काम आती है लेकिन भारत में यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। हमारे यहां एंबुलेंस का काम मरीजों को अस्पताल पहुंचाना है, जबकि दूसरे देश में मरीजों को प्री हॉस्पिटल इलाज एंबुलेंस में ही दे दिया जाता है।
यह सुविधा दिल के मरीजों को भी मिलती है। उक्त बयान देते हुए अमेरिका, चीन, रूस सहित 22 देशों में हार्ट के मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए प्रोसेस और प्रक्रिया का ज्ञान देने वाले डॉक्टर समीर मेहता ने कहा कि किंतु दिल्ली सहित भारत के दूसरे शहरों में न तो डॉक्टरों में यह कल्चर है और न ही मरीज एंबुलेंस की मदद को जरूरी समझते हैं।
10 मिनट में बच सकती है जान: भारतीय मूल के म्यांमार में डॉक्टर मेहता ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि औसतन हर रोज 84 लोग दिल्ली में हार्ट अटैक से मरते हैं और तकरीबन हर दस मिनट में एक को हार्ट अटैक का मामला सामने आता हैं। आश्चर्य की बात यह है कि 10 मिनट में ऐसे मरीज का इलाज संभव है और उनकी जान बचाई जा सकती है।
डॉक्टर ने कहा हार्ट अटैक के बाद तत्काल अगर एंबुलेंस पहुंच जाए तो उसमें मौजूद डॉक्टर तत्काल इको कार्डियोग्राम जांच कर सकता है, उसकी रिपोर्ट स्मार्ट फोन के माध्यम से कॉर्डियोलॉजिस्ट को बता सकता है और टेलीमेडिसीन की मदद से मरीज को थ्रोम्बोसिस का इंजेक्शन दी जा सकती है।