बंद कमरे में ही होगा मामले का ट्रायल, जारी रहेगी मीडिया पर रोक

नई दिल्ली. पैरामेडिकल छात्रा के साथ 16 दिसंबर को हुए गैंगरेप मामले का ट्रायल इन कैमरा किए जाने और मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने संबंधी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के फैसले को साकेत कोर्ट के जिला व सत्र न्यायालय ने बरकरार रखा है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के.गाबा ने अपने फैसले में कहा कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा सात जनवरी को जारी किए गए आदेश में कुछ भी अवैध और अनुचित नहीं था। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट न केवल अपने अधिकारों की सीमा में थीं, अपितु सीआरपीसी की धारा 327 के प्रावधानों को लागू करने के लिए बाध्य थीं।
सीआरपीसी की धारा 327 के प्रावधानों के तहत पीठासीन अधिकारी को दुष्कर्म और संबंधित अपराधों के मामलों में बंद कमरे में सुनवाई करना अनिवार्य होता है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अदालत कक्ष के हालात ऐसे थे कि वहां भारी संख्या में भीड़ की मौजूदगी की वजह से विचाराधीन कैदियों के खड़े होने के लिए भी जगह नहीं बची थी।
जिसकी वजह से अदालत को यह आदेश देना पड़ा। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक राजीव मोहन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें मांगी गई राहत सीआरपीसी के प्रावधानों के खिलाफ है, लिहाजा याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सात जनवरी को गैंगरेप मामले की पेशी के दौरान साकेत कोर्ट की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल की कोर्ट में भारी संख्या में मीडियाकर्मी और वकील एकत्रित हो गए थे। एक वकील द्वारा आरोपियों की पैरवी करने के प्रस्ताव के बाद कोर्ट रूम में वकीलों ने जमकर हंगामा किया था।
जिसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने दिल्ली पुलिस की याचिका पर इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में कैमरों की निगरानी के बीच करने का आदेश दिया था। एमएम नम्रता अग्रवाल ने इस मामले की अदालती प्रोसीडिंग से संबंधित मीडिया रिपोर्ट को प्रकाशित करने पर भी रोक लगा दी थी।





