सजा से बचने के लिए सरकारी गवाह बनना चाहते हैं दो आरोपी

नई दिल्ली. गैंगरेप के बाद निर्दयता से पिटाई कर पैरामेडिकल छात्रा को मौत की नींद सुलाने वाले छह में से दो आरोपी अब सजा से बचने के लिए सरकारी गवाह बनना चाहते हैं।
रविवार को साकेत कोर्ट की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ज्योति क्लेर के समक्ष पेश किए जाने के बाद पवन गुप्ता और विनय शर्मा नामक दो आरोपियों ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जाहिर की है।
वहीं, इस मामले के दो अन्य आरोपियों राम सिंह और उसके भाई मुकेश ने अदालत के समक्ष बचाव के लिए सरकारी वकील की मदद देने की गुहार लगाई है।
चारों आरोपियों की दलील सुनने के बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने चारों आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 19 जनवरी तक बढ़ाते हुए 7 जनवरी को संबंधित कोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है।
राम सिंह और मुकेश की याचिका पर विचार करने के बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के पास कोई वकील नहीं है।
लिहाजा अपने बचाव के लिए आरोपी सरकारी वकील की मदद ले सकते हैं। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपी पवन और विनय सरकारी गवाह बनने के लिए संबंधित अदालत में उचित आवेदन दायर कर सकते हैं।
इस मामले के पांचवे आरोपी अक्षय ठाकुर को सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा। वह नौ जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में है। मामले के छठे आरोपी के नाबालिग होने की वजह से मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड करेगा।
छात्रा के पिता ने बताया बेटी का नाम :
पीडि़त छात्रा के पिता चाहते हैं कि दुनिया उनकी बेटी का नाम जाने। उन्होंने ब्रिटिश अखबार 'द डेली मिरर' और 'द संडे पीपुल' को उसका नाम बताया। इसके बाद कहा, 'हम चाहते हैं कि दुनिया उसका वास्तविक नाम जाने। मेरी बेटी ने कुछ गलत नहीं किया है। उसकी जान खुद की रक्षा करते हुए गई है।
मुझे उस पर गर्व है। उसका नाम उजागर करने से ऐसे हमले झेलने वाली लड़कियों को साहस मिलेगा। उन्हें मेरी बेटी से ताकत मिलेगी।' पीडि़त के पिता इससे पहले बेटी के नाम पर कानून बनाने की मांग का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, सरकार ने इसे मानने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।
शिकायत दर्ज न करने वाले सस्पेंड हों: आरके सिंह
केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा, 'यदि कोई पुलिसकर्मी शिकायत दर्ज करने से इनकार करता है तो उसे तुरंत निलंबित करना चाहिए। इसमें कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। यह कानून में है। शिकायत दर्ज नहीं करना कानून का उल्लंघन है।'
केंद्रीय गृह सचिव ने कहा, 'महिलाओं या गरीबों के लिए थाने जाना ही अपने आप में मुश्किल है। छेड़छाड़ जैसी घटनाओं की जानकारी पुलिस को देने के बाद आने वाली मुश्किलों के कारण कई लोग थाने जाने से हिचकते हैं। हमें इस स्थिति में बदलाव लाना होगा।'





