भागमती और दिल्ली दोनों ही ज़ाहिलों के हाथों रौंदी जाती रहीं। भागमती को उसके गंवार ग्राहकों ने रौंदा, दिल्ली को बार-बार उजाड़ा विदेशी लुटेरों और आततायियों के आक्रमणों ने। भागमती की तरह दिल्ली भी बांझ की बांझ ही रही।
- खुशवंत सिंह की पुस्तक 'दिल्ली' का एक अंश
देश भर में किताबों और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के मकसद से नेशनल बुक ट्रस्ट ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले का आयोजन किया है। 4 फरवरी से शुरू हुआ यह उत्सव 10 फरवरी 2013 तक चलेगा।
मेले में चीन, अमेरिका, पौलेंड, दक्षिण कोरिया, तुर्की सहित 28 देशों के लगभग 1100 प्रकाशक भाग ले रहे हैं। इस पुस्तक मेले की शुरुआत 1972 में 'विंडसर प्लेस' में हुई थी, जिसमें सिर्फ 200 लोगों ने हिस्सा लिया था।
चूंकि यह मेला दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और लोगों में किताबों और पढ़ने के प्रति रुझान को बढ़ावा देना इसका मकसद है, सो इस मौके पर भास्कर डॉट कॉम अपने पाठकों में पुस्तकों के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए एक विशेष श्रृंखला की शुरुआत कर रहा है। इसके अंतर्गत हम आपको दिल्ली पर आधारित या दिल्ली से जुडी कुछ किताबों से परिचित करा रहे हैं।
इस कड़ी में आज पढ़िए, भारतीय पत्रकारिता जगत के सबसे बुजुर्ग पत्रकार द्वारा लिखी गई एक विवादास्पद किताब की कुछ पंक्तियां ...
(फोटो: दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में युवा रचनाकार)