3rd RESOLUTION FOR 2013: ऐसे पैदा करें चुनौती से निपटने का बूता
धर्म डेस्क. उज्जैन
| Dec 28, 2012, 15:47PM IST

शास्त्र कहते हैं कि विद्या यानी हर तरह से ज्ञान और दक्षता को पाना, हर इंसान के सफल जीवन के लिये निर्णायक साबित होती है। व्यावहारिक रूप से विद्या पाने का मतलब मात्र किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि तन, मन, विचार और व्यवहार से संपूर्ण व कुशल बन जाने से हैं।
असल में, विद्या बुद्धि, चरित्र और व्यक्तित्व को संवारती है। यही वजह है कि अच्छे भविष्य की चाहत के लिये नए साल में विद्यावान यानी ज्यादा से ज्यादा ज्ञान और कला को पाने का संकल्प उठाने का महत्व शास्त्र में बताई यह बात भी उजागर करती है -
विदेशेषु धनं विद्या व्यसनेषु धनं मति:।
परलोके धनं धर्म: शीलं सर्वत्र वै धनम्।।
इसमें सरल शब्दों में सबक है कि स्वदेश से बाहर विद्या संपत्ति के समान है। दुर्भाग्य या बुरे हालात में बुद्धिमानी ही धन है। परलोक में धर्म या नैतिक मूल्य धन के समान है। किंतु अच्छा चरित्र तो हर स्थिति धन के समान है, जो विद्या और ज्ञान से ही पावन बना रहता है।
इस तरह साफ है कि ज्ञान व्यक्ति को दूरदर्शी, बुद्धिमान, विवेकवान बनाकर जीवन से जुड़े अहम फैसले लेने में मददगार साबित होता है। विद्या व्यक्ति को गुणी, अहंकाररहित और विनम्र बना देती है, जिनसे व्यक्ति धर्म और कर्म के माध्यम से सभी सुख प्राप्त करने लायक बनता है। इसलिए नववर्ष में ध्यान रहे कि असफलता से बचने के लिए विद्या और ज्ञान को ही ढाल बनाएं।






