PIX: जानिए हनुमानजी की पूंछ से जुड़ी कुछ अनजानी व दिलचस्प बातें

श्रीहनुमान रुद्र के ग्यारहवें अवतार माने जाते हैं। यही वजह है कि अनोखी शिव लीलाओं की तरह ही हनुमानजी से जुड़े सारे पौराणिक प्रसंग उनका अद्भुत चरित्र व विलक्षण शक्तियां उजागर करते हैं।
बचपन में सूर्य को फल समझ मुंह में रख लेना, माता सीता की खोज में समुद्र को लांघना, बाण से आहत लक्ष्मण के लिए संजीवनी की खोज में पहाड़ को ही उठाकर लाना, रामभक्ति के लिए अगाध प्रेम को उजागर करने के लिए सीना चीर कर दिखाना जैसे सारे रोचक किस्से श्रीहनुमान की अतुलनीय शक्तियों के प्रमाण हैं।
शास्त्रों में सोने की तरह तेजस्वी व चट्टान जैसा मजबूत शरीर वाले, सारे गुणों रूपी निधियों के स्वामी, ज्ञानी, राम के परम भक्त जैसे श्रीहनुमान की महिमा के कई पहलू उजागर हैं। इसी कड़ी में श्रीहनुमान के दिव्य स्वरूप में पूंछ से जुड़े पहलू भी दिलचस्प हैं। अगली तस्वीरों पर क्लिक कर जानिए हनुमान की पूंछ से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य -
श्रीहनुमान की मूर्तियों में उनकी पूंछ नीचे की ओर जमीन से लगी या ऊपर की ओर उठी दिखाई देती है। असल में पूंछ की स्थिति व अलग-अलग शारीरिक मुद्राओं वाली हनुमानजी की मूर्तियां विशेष स्वरूप व प्रभाव को उजागर करती है।
इनके मुताबिक भक्त या दास हनुमान की पूंछ नीचे की ओर लटकी होती है और वे हाथ जोड़े या भक्ति की मुद्रा में होते हैं। हनुमान की ऐसी पूंछ पर दृष्टि का का असर भक्त के मन से आलस्य व दरिद्रता को दूर कर चेतना व ऊर्जा से भरने वाला माना गया है।
वहीं, वीर हनुमान की पूंछ ऊपर की ओर खड़ी रहती है, उनकी शारीरिक मुद्रा में दाहिना हाथ सिर की तरफ मुड़ा होकर उनके पैरों के नीचे राक्षस दबा होता है। वीर हनुमान की खड़ी पूंछ का प्रभाव भक्त की तमाम भीतरी व बाहरी शक्तियों को जाग्रत करने वाली होती है।
पूंछ से जुडे पौराणिक प्रसंग यह भी है कि हनुमान रुद्र अवतार हैं व उनकी पूंछ शक्ति का। इससे जुड़ी मान्यता है कि एक बार जब भगवान शिव ने माता पार्वती की इच्छा से कुबेर से सोने का महल बनवाया, किंतु ब्राह्मण का वेश रखकर आए अपने भक्त रावण द्वारा मांगने पर यह महल, माता पार्वती सहित दान कर दिया।
इस मां पार्वती नाराज हुई और शिव ने उनको मनाने के लिए वचन दिया की त्रेतायुग में मैं वानर रूप हनुमान का अवतार लूंगा उस समय तुम मेरी पूंछ बन जाना। जब मैं माता सीता की खोज में इसी सोने के महल यानी लंका जाऊंगा तो तुम पूंछ के रूप में लंका को आग लगाकर रावण को दण्डित करना।
यही प्रसंग भी शिव के श्री हनुमान अवतार और लंकादहन का एक कारण माना जाता है।







