PIX: साल के पहले दिन बोलें ये गणेश मंत्र, सालभर न रुकेगा कोई काम

भगवान गणेश प्रथम पूज्य देवता हैं। इसके पीछे जुड़ी एक पौराणिक मान्यता के मुताबिक भगवान श्रीगणेश विघ्रहर्ता ही नहीं बल्कि विघ्रकर्ता के रूप में भी पूजनीय हैं। श्री गणेश का यह विघ्रकर्ता स्वरूप सृष्टि की शुरुआत में जगत के प्राणियों के कार्य और व्यवहार में मर्यादा और सीमाओं को नियत करने वाला माना गया है। कर्म, विचार में भटकाव से आने वाले विघ्रों से रक्षा व मंगल कामनाओं की सिद्धि के लिए ही भगवान गणेश को सबसे पहले स्मरण की धार्मिक परंपरा बनी।
इस तरह श्रीगणेश के विघ्रहर्ता स्वरूप के ध्यान व पूजा से हर काम की बेहतर शुरुआत ही नहीं होती, बल्कि वह बिन कष्ट, बाधाओं के पूरा होता है। यही वजह है कि व्यावहारिक जीवन में नए साल के पहले दिन भी विशेष मंत्रों से श्रीगणेश की पूजा सालभर विघ्र, कष्ट, दु:ख और संकटों से बचाकर जीवन के हर सपने व इच्छाओं को पूरा करने वाली मानी गई है।
अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए, नए साल के पहले दिन किन विशेष मंत्रों से श्रीगणेश की पूजा करें-
- सुबह सूर्योदय से पहले जागें और स्नान करें।
- घर या देवालय में पीले वस्त्र पहन श्री गणेश की पूजा सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत, अबीर, गुलाल, सुंगधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, मौसमी फल व भोग में लड्डू अर्पित करें।
- पूजा के बाद पीले आसन पर बैठ नीचे लिखे आसान किंतु अचूक श्री गणेश मंत्रों में से कोई भी यथाशक्ति ध्यान और स्मरण करें -
गणेश गायत्री मंत्र -
एकदंताय विद्महे,
वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
पौराणिक मंत्र -
श्री गणेशाय नम:
ऊँ श्री गणेशाय नम:
सबीज गणपति मंत्र -
- गं गणपतये नम:
प्रणवादि सबीज गणपति मंत्र -
- ऊँ गं गणपतये नम:
- ऊँ गं ऊँ
- मंत्र स्मरण के बाद सुंगधित धूप और घी के दीप से श्री गणेश की आरती सपरिवार श्रद्धा और भक्ति से करें।
भगवान श्री गणेश बुद्धि, सिद्धी के दाता होने के साथ भय, चिंता दूर करने वाले देवता हैं। यही कारण है इन गणेश मंत्रों को बोल गणेश का ध्याान साल के साथ-साथ पूरी जिं़दगी कवच की तरह अनचाहे कष्टों से बचाकर मनचाहे नतीजे देता है।






