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आईएसआई एंट्रेंस एग्जाम-2013: मैथ्स और स्टैट्स की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा

education Bhaskar | Apr 24, 2013, 13:01PM IST
आईएसआई एंट्रेंस एग्जाम-2013: मैथ्स और स्टैट्स की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा

 




नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट
 
यूनिवर्सिटी में टीचिंग जॉब या पीएचडी में एडमिशन के लिए क्वालिफाइंग एग्जाम नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) 30 जून को होगा। इसके जरिए छात्र जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए भी अप्लाई कर सकेंगे। 
 
कम्पीटिशन
सीटें                आवेदक 
निर्धारित नहीं/ 7 लाख
 
टॉप 15 फीसदी छात्र लेक्चररशिप के लिए योग्य होंगे।
 
जेआरएफ: नेट में मेरिट में आने वाले स्टूडेंट्स को यूनिवर्सिटीज जूनियर रिसर्च फेलोशिप देती हैं। इसमें छात्रों को 12 हजार रु. प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाता है। जेआरएफ के लिए 28 साल से कम उम्र के छात्र ही अप्लाई कर सकते हैं। वहीं एससी/एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स 33 साल तक एलिजिबल होते हैं। लेक्चररशिप के लिए कोई एज-लिमिट नहीं है। 
 
एलिजिबिलिटी: मास्टर्स डिग्री में 55 फीसदी अंक।
 
रिजल्ट: अक्टूबर 2013
 
जेआरएफ के बाद रिसर्च भी
 
1. मेरिट लिस्ट बनने के बाद छात्रों को जेआरएफ दी जाती है। इसके बाद वे अपने पीजी कोर्स के विषय में रिसर्च कर सकते हैं या किसी यूनिवर्सिटी, आईआईटी या नेशनल इंस्टीट्यूट्स में पढ़ा सकते हैं। 
2. हर सब्जेक्ट के लिए जेआरएफ की सीटें निर्धारित होती हैं। 
 
 
ऑब्जेक्टिव पैटर्न
2012 में यूजीसी ने नेट एग्जाम को सब्जेक्टिव से ऑब्जेक्टिव कर दिया गया। लंबे पेपर की वजह से छात्र समय पर पेपर नहीं कर पाते थे। इसलिए ये कदम उठाया गया।
 
एग्जाम पैटर्न
 
नेट में तीन ऑब्जेक्टिव पेपर होंगे। पहले पेपर में टीचिंग और रिसर्च एप्टीट्यूड के 60 सवाल रहेंगे जिनमें से 50 के जवाब देने होंगे। दूसरे पेपर में 50 सवाल छात्र के चुने हुए सब्जेक्ट के होंगे। ये दोनों पेपर 100-100 अंक के होंगे। तीसरे पेपर में 75 सवाल रहेंगे। परीक्षा में माइनस मार्किग नहीं होगी। पहले और दूसरे पेपर में पासिंग मार्क्‍स अलग-अलग 40 फीसदी होंगे। पहले दो पेपर में पासिंग मार्क्‍स मिलने के बाद ही तीसरा पेपर जांचा जाएगा और इसमें पासिंग मार्क्‍स 50 फीसदी होंगे। जेआरएफ की मेरिट लिस्ट अलग से बनेगी। 
 
नॉलेज
5% क्वालिफाई, सिर्फ 0.47%  को जेआरएफ
 
2012 में एग्जाम का पैटर्न ऑब्जेक्टिव करने के बाद भी मात्र 5 फीसदी छात्र ही नेट क्लीयर कर पाए। पिछले साल दिसंबर में 7.8 लाख छात्रों ने एग्जाम दी जिसमें से मात्र ३९,२२६ छात्र क्वालिफाई हुए। इनमें से भी सिर्फ 0.47 फीसदी (३६६९) को जेआरएफ मिली।
 
रोचक किस्सा
टीचिंग कोई बिजनेस नहीं है
 
अगर मैं आपके स्कूलों की तरह अपनी आइसक्रीम कंपनी चलाता, तो शायद मेरा बिजनेस कब का डूब गया होता।- अमेरिका के एक ऑडिटोरियम में ब्ल्यूबेरी आइस्क्रीम बनाने वाली कंपनी के मैनेजर ने अपनी बात इन शब्दों के साथ खत्म की। उनका मानना था कि पब्लिक स्कूलों में सुधार की जरूरत है।
 
तभी वहां बैठी एक टीचर ने हाथ खड़ा किया। सौम्य, विनम्र। बोलीं- क्या आप जानते हैं अभी बैक स्टेज से सड़ी हुई ब्ल्यूबेरी ले जाई गई है? बिजनेसमैन ने कहा हां, जानता हूं। हम सड़ी ब्ल्यूबेरी आइस्क्रीम में इस्तेमाल नहीं करते। टीचर ने कहा, यही अंतर है। हम कमजोर, गरीब, मजबूर बच्चों को भी होनहार बच्चों की तरह ही प्यार देते हैं। उनकी जिंदगी सुधारने में अपनी जिंदगी गुजारते हैं। सड़ी ब्ल्यूबेरी की तरह उन्हें फेंक नहीं देते। सर, ये आपकी कंपनी नहीं, हमारा स्कूल है। - जेमी रॉबर्ट वॉल्मर
 
भास्कर एक्सपर्ट पैनल
 
प्रो. यशपाल
पूर्व चेयरमैन, यूजीसी
 
मेरा मानना है कि अच्छा टीचर वही हो सकता है जो नई चीजें सीख सके और दूसरों को भी सिखा सके। इसलिए चेयरमैन रहते हुए मैंने इस परीक्षा में बेसिक्स पर ज्यादा जोर दिया। उस समय कई लोगों ने विरोध भी किया था। लेकिन आज जब हमारा देश एजुकेशन क्षेत्र में सुपर पावर बनने जा रहा है, तो इसकी अहमियत का पता चलता है। नेट में सफलता का सीधा फंडा यही है कि आपके बेसिक कॉन्सेप्टस बिल्कुल क्लीयर हों। इस एग्जाम में सक्सेस रेट कम होना भी कोई चिंता की बात नहीं है क्योंकि ‘वी कान्ट अफोर्ड एवरीवन टू बी ए टीचर’। 
 


 

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