वासेपुर का गमछा, टांगों से उठकर कांधे पर टंगा

लो! गमछा फिर नई सोच और संस्कार के संग हाजिर हुआ है। प्रयोगधर्मी सिनेमेकर अनुराग कश्यप ने गैंग्स ऑफ वासेपुर के जरिये गमछे को ग्लोबल-वस्त्र बनाने में एक प्रयोग किया है। यह दीगर बात है कि, वर्ष 2004 में इससे हटकर एक अनूठा प्रयोग नासा के अंतरिक्ष यात्री एडवर्ड माइकल फिंक कर चुके हैं।
फिंक जब अंतरिक्ष से धरती पर लौटे तो उन्होंने असम के सीएम को वो भाग्यशाली गमछा बतौर सम्मान हवाले किया था, जिसे वे अपने संग ब्रह्मांड के भ्रमण पर ले गए थे। यह सौभाग्यशाली गमछा इन दिनों असम के एक संग्रहालय के सिर चढ़कर बोल रहा है। यह गमछा इस वजह से भी गुमान कर सकता है, क्योंकि इस पर सुनीता विलियम्स सहित उन सभी छह सह अंतरिक्ष यात्रियों के दस्तखत हैं।
हालांकि अनुराग कश्यप का प्रयोग और प्रयास इसलिए भी साहसिक है कि उन्होंने गमछे को सांवरिया-टाइप इमेज से उबारा है। सांवरिया में गमछे ने नायक रणवीर कपूर को एक सेक्सीलुक में प्रस्तुत किया, तो वासेपुर ने इसी गमछे को टांगों से उठाकर कांधे पर टांग दिया।
गमछे का अपना एक इतिहास और संस्कृति रही है। यह अहिंसा का भी अंग रहा है, तो हिंसात्मक गतिविधियों का भी। चंबल टाइप लगभग सभी दस्यु-प्रधान फिल्मों में गमछा संदिग्धों की पहचान छिपाने में महत्वपूर्ण वस्त्र साबित हुआ। लेकिन फर्क इतना रहा कि गमछा उन्हीं फिल्मों में महत्वपूर्ण सिने-प्रॉपर्टी साबित हुआ, जिनके निर्माण में भारतीय ग्रामीण परिवेश की गंध मौजूद रही। हिंसा फैलाने वाले गैंग्स, ज्यों ही दाऊद टाइप गैंगस्टर बने, उन्होंने चेहरे को गमछे से छिपाना अपनी तौहीन समझा।
अनुराग का गमछा रक्त-रंजित है, बावजूद अब यह भारतीय फैशन को एक नई लालिमा और दिशा देगा। बात चल पड़ी है, तो जिक्र करना लाजिमी होगा कि गमछे को लेकर अहिंसक-मार्ग के प्रवर्तक(प्रमोटर) भगवान बुद्ध भी बेहद अनुरागी थे। गांधार मूर्तिकला शैली की सबसे उत्कृष्ट मूर्ति वह है, जिसमें बुद्ध को एक योगी के रूप में बैठे हुए दिखाया गया है। एक संन्यासी की वेश-भूषा में बैठे हुए बुद्ध यूं प्रतीक होते हैं गोया एक शक्ति पुंज विराजमान हो। बड़ी-बड़ी आंखें, ललाट पर तीसरा नेत्र और सिर पर उभार। ये तीनों यह संकेत देते हैं कि वह सब सुन रहे हैं और सबकुछ देख-समझ रहे हैं। यानी वे अंतरयामी हैं। इनमें से कई मूर्तियों में उन्हें गमछा लपेटे भी देखा जा सकता है।
कह सकते हैं कि गमछा समाज, इतिहास, संस्कृति और धर्म का भी अभिन्न अंग-वस्त्र रहा है। यदि बात सिर्फ फिल्मी करें, तो गमछा सिनेमाई कला में भी वर्षों से कलाकारी दिखाता आ रहा है। हां, अनुराग कश्यप इस कारण से यहां खास हो जाते हैं, क्योंकि उन्होंने फिल्म की खास स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म के कलाकारों मनोज वाजपेयी, प्रतीक बब्बर, अभय देओल यहां तक कि अभिनेत्री दीया मिर्जा तक के कांधे पर गमछे को टांगकर बॉलीवुड की हाईक्लास सोसायटी की चोचलेबाजी को एक खूंटी पर टांग कर रख दिया है, जो गांवों से कमाती है, लेकिन उसे गांव की माटी-मानस से दुर्गंध आती है।







