मनीषा कोइराला कैंसर से पीडि़त हैं और अमेरिका में उनकी शल्य चिकित्सा की गई है। नेपाल के राजनीतिक परिवार से आई इस षोडशी को सुभाष घई ने अपनी फिल्म 'सौदागर' में प्रस्तुत किया था।
पाकिस्तान की एक फिल्म से प्रेरित यह कहानी दो दोस्तों की है, जिन्हें परिस्थितियां दुश्मन बना देती हैं। यह सिनेमाई ड्रामा अंग्रेजी फिल्म 'द बेकेट' से प्रारंभ हुआ, जिसमें इतिहास आधारित घटना को प्रस्तुत किया गया था। लड़कपन से दोस्त थे युवराज हैनरी और बेकेट। राज्याभिषेक होने के बाद संपूर्ण सत्ता हथियाने के लिए राजा अपने बचपन के मित्र बेकेट को चर्च में सर्वोच्च स्थान दिलाता है। लेकिन ईश्वर का सेवक बनने के बाद बेकेट राजा के अन्याय के विरुद्ध खड़ा हो जाता है। राजा को धरती पर ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता है और उसे भाग्य विधाता भी माना जाता है।
उधर चर्च का अधीक्षक भी स्वयं को राजा का प्रतिनिधि मानता है। राजसत्ता बनाम धर्मसत्ता का युद्ध शुरू होता है। सदियों से चला आ रहा यह सत्ता-संघर्ष उन सब देशों में कहर ढाता है, जहां राजनीति में धर्म का प्रवेश करके धर्मनिरपेक्षता को हाशिये में डाल देते हैं, जैसे पाकिस्तान में हुआ। जहां सरकारी नियम को ताक पर रखकर मौलवी के फतवे को कानून से ऊपर माना जाने लगा। भारत ने धर्मनिरपेक्षता या छद्म धर्मनिरपेक्षता के सहारे कई दशक गुजार दिए, परंतु विगत बीस वर्षों में धर्म फिर राजनीति में शक्ति के रूप में उभर रहा है। बहरहाल इसी कथा के आधार पर ऋषिकेश मुखर्जी ने
अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना को लेकर 'नमक हराम' बनाई थी।
आगे जानिए, मनीषा का दिलीप कुमार और नाना पाटेकर से खास संबंध
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