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मुश्किल हो जाएगा इंसान और रोबोट के बीच भेद कर पाना!

मुकुल व्यास | Jul 21, 2012, 09:46AM IST
 
 

एक दिन मनुष्य और रोबोट के बीच भेद कर पाना मुश्किल हो जाएगा। वैज्ञानिक ऐसे रोबोट के निर्माण के बहुत नजदीक पहुंच गए हैं, जिसके हाव-भाव मनुष्यों जैसे होंगे। इटली में पीसा यूनिवर्सिटी के रोबोट-वैज्ञानिकों को इस दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। उन्होंने एक ऐसा रोबोट विकसित किया है, जो मनुष्य के चेहरे पर आने वाले सारे भावों को सही-सही ढंग से दोहरा सकता है।

खुशी, दुख, निराशा, हैरानी, उदासीनता और डर मनुष्य के चेहरे पर दिखने वाले छह बुनियादी भाव हैं। फेस नामक यह रोबोट न सिर्फ इन सभी भावों की नकल कर सकता है, बल्कि कुछ मिले-जुले भावों, जैसे आश्चर्यमिश्रित खुशी भी अपने चेहरे पर ला सकता है।

कई वर्षों के अनुसंधान के बाद यह रोबोट विकसित हो पाया है। रोबोट का मॉडल एक रिसर्चर की पत्नी के आधार पर बनाया गया है। फेस की पॉलिमर स्किन के नीचे लगी 32 मोटरों द्वारा उत्पन्न हलचल से यह 'महिला' रोबोट हर तरह के भाव उत्पन्न कर सकती है।

निकोल लाजेरी के नेतृत्व में पीसा यूनिवर्सिटी की टीम ने रोबोट के चेहरे पर विभिन्न भाव लाने के लिए एक खास तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है। मनुष्य के चेहरे पर भावनाएं दर्शाने के लिए चेहरे की 100 से ज्यादा मांसपेशियां जिम्मेदार होती हैं। इनमें से अधिकांश के आकार में अंतर होता है और उनके कार्य भी अलग होते हैं।

32 मोटरों की मदद से चेहरे पर ज्यादा से ज्यादा भाव लाने के लिए वैज्ञानिकों ने हेफेस (हाइब्रिड इंजिन फॉर फेशियल एक्सप्रेशंस सिंथेसिस) प्रोग्राम तैयार किया है। यह प्रोग्राम मोटरों को नियंत्रित करता है और बताता है कि वांछित भाव लाने के लिए मोटरों को किस तरह काम करना चाहिए। फेस रोबोट ने 20 बच्चों के सम्मुख चेहरे के हाव-भाव दिखाए। इन बच्चों में ऑटिज्म से पीडि़त 6 बच्चे भी शामिल थे।

सभी बच्चों ने खुशी, दुख और क्रोध के भाव आसानी से पहचान लिए, लेकिन उन्हें निराशा, डर और आश्चर्य जैसे भावों को पहचानने में कठिनाई हुई। लाजेरी ने पिछले महीने रोम में बायोरोब अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन में अपने इस हाव-भाव वाले रोबोट का प्रदर्शन किया था। इस सम्मलेन में चिकित्सा और जीव विज्ञान के क्षेत्रों में रोबोटों के उपयोग पर नए अनुसंधानों की जानकारी दी जाती है।

(लेखक वैज्ञानिक विषयों के जानकार हैं।)
 
 
 

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