वैज्ञानिकों ने अफ्रीका में बंदर की एक नई प्रजाति की खोज का दावा किया है। इस नई प्रजाति के बारे में बताया जा रहा है कि इसके शरीर का पिछला हिस्सा गहरे नीले रंग का है। साइंस की ऑनलाइन पत्रिका पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ़ साइंस में इस खोज के बारे में छापा गया है। लेसुला नाम की इस नई प्रजाति की पहचान डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में की गई। इस प्रजाति की करीबी प्रजातियां कॉन्गो और लोमामी नदी के पार रहती हैं।
कई पर्यावरणविदों का मानना है कि बंदर की इस नई प्रजाति की खोज कॉन्गो बेसिन में जीव-विविधता का संरक्षण करने की जरूरत को दर्शाती है। इस बंदर के खोज की कहानी भी बड़ी निराली है। उन्होंने पहली इस नई प्रजाति के एक मादा बंदर को यहां के स्थानीय प्राइमरी स्कूल के एक निदेशक के पास देखा, जिसने इसे पिंजरे में बंद कर रखा था।
वे इसे लेसुला के नाम से बुलाते थे, जो यहां के स्थानीय शिकारियों के बीच प्रचलित आम नाम है। बाद में इस बंदर को वैज्ञानिकों ने अपने संरक्षण में ले लिया। बाद में इन वैज्ञानिकों को ऐसे कई और बंदर मिले, जिन्हें स्थानीय निवासियों ने पकड़ रखा था।
इस प्रोजेक्ट की अगुआई करने वाले डॉक्टर हॉर्ट कहते हैं, “जब हमने इलाके में अपना काम शुरु किया था तो हमें पता था कि इस क्षेत्र में काफी कुछ है जो हमें पता नहीं है। लेकिन हमें ये नहीं पता था कि हमारी खोज जैविक रूप से इतनी अहम होगी। हमें उम्मीद नहीं था कि हम एक नई प्रजाति की खोज कर लेंगे।”
वैज्ञानिकों ने नई प्रजाति का नाम सरकोपाईथीकस लोमामाइनसीस (Cercopithecus lomamiensis) रखा है। हालांकि, शोधकर्ताओं को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं बंदर की यह नई प्रजाति शिकारियों के निशाने पर न आ जाएं। वहीं, कई जीव विज्ञानियों को यह भी लगता है कि इन जंगलों में और भी नई प्रजातियां हो सकती हैं।