आधुनिक हथियारों से लैस सशस्त्र सेना, पैरामिल्रिटी फोर्सेज और एनसीसी कैडेट्स की टुकड़ियों की बैंड की धुन पर कदमताल का नजारा बुधवार को गणतंत्र दिवस परेड की फुड ड्रेस रिहर्सल में दिखा। राजपथ पर देश की प्रगति, सैन्य क्षमता व सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन हर साल लोगों का मन मोहता है।
इस प्रदर्शन को देखने के हर वर्ष किसी दूसरे देश का राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि के रूप में आता है। इस बार भूटान नरेश जिग्मे केसर नामग्याल वांगचुक परेड में मुख्य अतिथि होंगे। भूटान नरेश और महारानी को राष्ट्रपति ने आमंत्रित किया है।
यह चौथा अवसर होगा जब भूटान के राष्ट्रप्रमुख गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे। किसी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने की परम्परा पहले गणतंत्र दिवस से ही शुरू हो गई थी। 1970 तक अधिकांश अतिथि गुट निरपेक्ष देशों के राष्ट्राध्यक्ष रहे।
हालांकि शीतयुद्ध की समाप्ती के बाद पश्चिमी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भी मेजबानी भारत ने की। सबसे महत्वपूर्ण बात हमारे दो पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन के राष्ट्राध्यक्ष भी इस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हो चुके हैं। एक और बात 1950 के बाद शुरुआत कुछ सालों तक गणतंत्र दिवस दिल्ली के अगल-अलग स्थानों पर मनाया जाता है।
64वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुरू की गई विशेष सीरीज में आज dainikbhaskar.com आपको बता रहा है गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले मुख्य अतिथियों से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
आगे की स्लाइडो में जाने आखिर कब-कब पाकिस्तान और चीन के राष्ट्राध्यक्ष बने गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि। कब से राजपथ पर शुरू हुई परेड और इस परेड में क्या होता है खास। किस देश के राष्ट्रध्यक्ष बने थे पहले गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि।
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