रबर
1800 के मध्य में चार्ल्स गुडइयर ने खोजा कैसे रबर को उसके नेचुरल फॉर्म से वल्केनाइजेशन प्रक्रिया द्वारा बेहतर बनाया जाए। औद्योगिक क्रांति के बाद रबर के कोर्सेट और कपड़े बनाए गए। लोगों का मानना था इसे पहनने से पसीना बहेगा जिससे वजन घटेगा। पुरुष और महिलाएं दोनों इसका प्रयोग करते थे। वह इतने तंग होते कि त्वचा के अंदर मांस नर्म होकर टूटने लगता और संक्रमण हो जाता था।