बीजिंग. आईपैड और आईफोन जैसे मशहूर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बनाने वाली कंपनी एपल पर मानवाधिकारों और श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगा है। एपल के कई मशहूर गैजेट चीन में उसके सप्लायर बनाते हैं। इन प्लांटों में काम कर रहे चीनी मजदूर इतने खराब हालात में काम कर रहे हैं कि उनमें से कई लोगों ने आत्महत्या की कोशिश तक कर डाली है।
एपल ने फेयर लेबर एसोसिएशन (एफएलए) के प्रतिनिधियों को अपने प्लांटों का दौरा करने की इजाजत तब दी जब उसके प्लांटों में बेहद खराब हालत में काम कर रहे मजदूरों की बात सामने आई।
एपल पर गैजेट बनाने के काम में लगे मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगा है। आरोप है कि इस कंपनी के गैजेट बनाने वाले मजदूरों की शिफ्ट 10 घंटे की होती है, जिसमें एक आधिकारिक ब्रेक होता है। इन प्लांटों में काम कर रहे मजदूर बेहद साधारण मजदूरी पाते हैं। उन्हें बहुत देर तक खड़े रहना पड़ता है, जिससे उनके पैरों में सूजन आ जाती है। इसके अलावा इन प्लांटों में सुरक्षा के मानदंडों को अनदेखा किए जाने की भी बात कही जा रही है। पिछले साल ही एपल बनाने वाले प्लांटों में नए आईपैडों को पॉलिश करते समय निकली धूल में आग लग जाने की वजह से दो धमाके हुए थे।
पिछले हफ्ते चाइना लेबर वॉच नाम के संगठन ने एपल के सीईओ टिम कुक को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि एपल को अपने मुनाफे को घटाना चाहिए ताकि उसे गैजेट मुहैया कराने वाले सप्लायर मजदूरी बढ़ा सकें और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम कर सकें। कुक ने इस बाबत कहा, 'मैं मानता हूं कि मजदूरों को हर जगह सुरक्षित और न्यायपूर्ण माहौल में काम करने का हक है। यही वजह है कि हम लोगों ने एफएलए को उन प्लांटों का निरीक्षण करने को कहा है, जिसे हमारे सप्लायर चला रहे हैं।' एफएलए की पहल के बाद दक्षिणी चीन के शहर शेंजेन में फॉक्सकॉन प्लांट में एपल का आईपैड बनाने का काम कर रहे हजारों चीनी श्रमिकों को उन पर हो रहे अत्याचार के बारे में बताने का मौका दिया जा रहा है। एफएलए के निरीक्षक इस प्लांट में काम कर रहे श्रमिकों से जल्द पूछताछ करेंगे। इस प्लांट में 2010 में आत्महत्या करने के 13 मामले सामने आए थे। चेंगडू में मौजूद फॉक्सकॉन की एक अन्य फैक्ट्री में मजदूरों के हालात की जांच की जाएगी।
एपल ने एक बयान में कहा है कि उसके सभी सप्लायरों ने एफएलए के निरीक्षकों के साथ सहयोग करने और अपने मजदूरों को पूरी आज़ादी के साथ अपनी बात रखने देने पर सहमति जाहिर की है। एफएलए के प्रतिनिधि मजदूरों से उनकी काम करने और रहने के हालात के बारे में पूछेंगे। इसमें उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, मजदूरी और काम करने के घंटे जैसी बातें शामिल होंगी। एफएलए के प्रतिनिधि फैक्ट्रियों में मौजूद सुविधाओं की भी जांच करेंगे। इन प्लांटों में मानवाधिकार के उल्लंघन की वास्तविक स्थिति पर रिपोर्ट अगले महीने सामने आएगी।
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