लॉस वेगास. यहां हुए कंज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स शो में कई लांच किए गए कई नए गैजेट में ऐसे स्मार्टफोन भी शामिल थे जो प्रकाश की किरणों के जरिए डाटा ट्रांस्फर कर सकते थे। इस स्मार्टफोन को जापान की कंपनी कैसियो ने विकसित किया है।
हालांकि अभी सिर्फ प्रोटोटाइप ही विकसित किया गया है लेकिन इस नई तकनीक, जिसे ‘लाई-फाई’ नाम दिया गया है, को लेकर काफी उत्साह है। फोन के स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी की किरणें ऐसी हैं कि उन्हें आंख से तो नहीं देखा जा सकता लेकिन फोन का कैमरा दस मीटर की दूरी तक उन्हें पकड़ सकता है।
ब्लू टूथ और वाई फाई के जमाने में रोशनी जलाकर संदेश देने के तरीके को इजाद करना पुराने युग में लौटने जैसा लग सकता है लेकिन वास्तव में ये एक नए संचार युग की शुरुआत है। लाई-फाई की रोशनी की किरणें संचार क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती हैं।
इंटरनेट का इस्तेमाल चाहे आप घर में करते हों या दफ्तर में, इस टेक्नोलॉजी के जरिये बेहद तेज वायरलेस कनेक्टिविटी का वादा किया जा रहा है। लाइ-फाइ कंसोर्टियम का दावा है कि जिसे हम ‘हाई-स्पीड’ मानते हैं, उससे यह 8000 गुना तेज होगा।
जो प्रोटोटाईप शो में पेश किया गया उसमें हालांकि फोन के बीच संदेश ही ट्रांस्फर किए गए लेकिन कंपनी भविष्य में इसके नए-नए प्रयोग देखती है। कंपनी की योजना के मुताबिक इस तकनीक के जरिए स्मार्टफोन किसी दुकान के साइनबोर्ड की रोशनी को पकड़कर उसके बारे में अधिक जानकारी दे सकेगा।
हालांकि यह एक संभावना ही है। पिछले साल अक्टूबर में कंपनियों के समूह ने लाई-फाई कंसोर्टियम बनाकर इस तकनीक के विकास को प्रोत्साहित किया था ताकि तेज गति से डाटा ट्रांस्फर करने वाले ओप्टिकल वायरलैस सिस्टम विकसित किए जा सकें।
लाई-फाई से उम्मीद बढ़ती उम्मीद का एक कारण यह भी है कि रेडियो स्पैक्ट्रम सीमित हैं। लगातार रेडियो स्पैक्ट्रम का इस्तेमाल करके इंटरनेट से जुड़ने वाले उपकरणों का आंकड़ा बढ़ रहा है। भविष्य में स्पैक्ट्रम की कमी एक बड़ी समस्या होगी।
रोशनी की किरणों का इस्तेमाल करके डाटा ट्रांस्फर की तकनीक विकसित करने से रोशनी पर आधारित या स्पैक्ट्रम खुल जाएगा, जो रेडियो स्पैक्ट्रम और वायर नेटवर्क के मुकाबले काफी सस्ता भी होगा।
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