50 लाख करोड़ रु. का एप्पल! इतनी दौलत के मायने क्या?

नॉलेज. एप्पल यानी कामयाब इनोवेशन और जबर्दस्त मार्केटिंग। फिलहाल कंपनी की मार्केट कैपिटल 30 लाख करोड़ रुपए है। लेकिन सालभर में उसके 50 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। इस दौलत को ऐसे समझें...
1. चाहे तो बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के 80 फीसदी शेयर खरीद ले। (बीएसई का मार्केट कैप 61 लाख करोड़ रु. है)
2. हमारे रक्षा बजट से 25 गुना ज्यादा संपत्ति है एप्पल के पास। वह चाहे तो अमेरिका के इराक और अफगानिस्तान युद्ध का तीन-चौथाई खर्च उठा ले। (भारतीय रक्षा बजट करीब दो लाख करोड़ रु. है)
3. सिर्फ डेढ़ फीसदी ही दौलत खर्च करनी होगी एप्पल को, वह भारत के सभी दसवीं और बारहवीं के छात्रों को आईपैड दे सकता है। (सीबीएसई और स्टेट बोर्ड में ढाई करोड़ छात्र हैं)
4. बजट में प्रस्तावित कुल खर्च से तुलना की जाए तो यह एप्पल की मार्केट कैपिटल का 30 फीसदी ही है। (2012-13 के बजट में कुल 15 लाख करोड़ रु. के खर्च का प्रावधान है)
5. एप्पल चाहे तो भारत की सभी महिलाओं को अमेरिका की यात्रा करा दे।(58 करोड़ महिलाएं हैं भारत में, हर यात्री का खर्च 85 हजार रु. )
सस्पेंस में है सफलता का राज
जॉब्स अपने प्रोडक्ट और रणनीति को लेकर मार्केट और कंज्यूमर के बीच सस्पेंस बनाते। फिर ही तय करते कि कंपनी में कौन-सा व्यक्ति कब बयान देगा। वे इसकी रिहर्सल भी करते।
2004 में उन्होंने अपनी कैंसर की बीमारी को भी राज रखा। ऑपरेशन के बाद उन्होंने ही अपने एक ईमेल को मीडिया में लीक करवाया। ताकि लोगों को पता चले।
2007 में पहले आईफोन के बारे में कोई घोषणा नहीं की। मीडिया ने उनके प्रोडक्ट को लेकर काफी अटकलें लगाईं। जिसे करीब 400 मिलियन डॉलर की मुफ्त एडवरटाइजिंग माना गया।
इन्वेंशन साबित हुए इनोवेशन
म्यूजिक प्लेयर आईपॉड, स्मार्टफोन आईफोन और टेबलेट आईपैड मील का पत्थर साबित हुए।
आईपॉड मार्केटिंग: 1000 गाने आपकी जेब में।
एप्रोच : 'मैं संगीत के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम बनाता हूं। इसलिए माइक्रोसॉफ्ट के बजाए सोनी को टारगेट करूंगा'। -जॉब्स
नतीजा : लोग बाजार में पॉकेट एमपी3 प्लेयर को भी आईपॉड कहकर ही खरीदते। सोनी का वॉकमैन तो चलन से ही बाहर हो गया।








