वहीं माइक्रोमैक्स की हिस्सेदारी 15 फीसदी की रही। माइक्रोमैक्स ने सस्ता और बेहतरीन फीचर्स वाला टैबलेट लॉन्च कर बाजार में छाने की कोशिश की। टैबलेट रखने की इच्छा रखने वालों के लिए यह कंपनी बहुत बड़ी साबित हुई, क्योंकि जो लोग महंगा होने के कारण टैबलेट नहीं खरीद पा रहे थे, उनके सपने को माइक्रोमैक्स ने ही साकार किया।