नई दिल्ली. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 साल की उम्र में 1967 में अपना घर छोड़ दिया था और उसके बाद आज तक वे घर किसी से मिलने नहीं आए हैं। यह कहना है मोदी के बड़े भाई और सरकारी अधिकारी के पद से रिटायर हुए सोमाभाई मोदी का। सोमाभाई खुद 67 साल के हैं। सोमाभाई ने एक अंग्रेजी दैनिक से बातचीत में यह बताने की कोशिश की है कि आज दुनिया जिस मोदी को देख रही है, वह ऐसे कैसे बने। सोमाभाई से पूछा गया कि क्या मोदी गुजरात के सीएम फिर बनेंगे, इसके जवाब में सोमाभाई ने कहा-'गुजरात के इतिहास में किसी भी मुख्यमंत्री के काम की तुलना नरेंद्र मोदी से नहीं की जा सकती है। उनके साथ जनमत है, जो सुनिश्चित करेगा कि वह फिर से गुजरात के सीएम बनें।' (
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क्या परिवार उनका समर्थन करता है? इस सवाल के जवाब में सोमाभाई ने कहा, 'उन्हें हमारी जरूरत नहीं है। और न ही हम उनके कामकाज में दखल देना चाहते हैं। हम काम को लेकर उनके समर्पण को समझते हैं। उन्होंने 45 साल पहले घर छोड़ दिया था। वे अपने भतीजों की शादी तक में नहीं आते हैं। आखिरी बार मैं ढाई महीने पहले उनसे एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मिला था।'
क्या सीएम होने की वजह से ऐसा हो रहा है? सोमाभाई ने कहा, 'ऐसा नहीं है। इस बात मुख्यमंत्री होने या न होने से मतलब नहीं है। अगर वे मुख्यमंत्री नहीं भी होते तो भी वे वैसे ही रहते। शायद इसकी वजह उनके आरएसएस के संस्कार हैं।'
सांप्रदायिक दंगों के दाग पर मोदी के भाई ने कहा, 'इसके जवाब में मैं वही बात कहूंगा जो मेरे मित्र मुझे बताते हैं। कश्मीर से लौटने के बाद उन लोगों ने मुझे बताया था कि लोगों को लगता है कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाएं तो लंबे समय से लटका कश्मीर का मुद्दा हल हो जाएगा। गुजरात और कश्मीर में लोगों के मन में इस तरह की भावना है।'
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(तस्वीर: अहमदाबाद से 110 किलोमीटर दूर स्थित वडनगर, जहां बीता है मोदी का बचपन)