विज्ञापन
 
Home >> Gujarat >> Ahmedabad >> Religion-Based Scholarship Scheme Was Valid

मोदी को मात, कोर्ट ने धर्म आधारित छात्रवृति योजना को बताया वैध

दिव्य भास्कर नेटवर्क | Feb 16, 2013, 12:48PM IST
 
 

अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झटका देते हुए केंद्र की प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना को वैध करार दिया है। साथ ही कहा है कि राज्य सरकार को यह योजना लागू करनी चाहिए। अदालत ने योजना के अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन न करने की राय देते हुए कहा कि संविधान में नागरिकों को समान सामाजिक न्याय दिलाने के लिए निर्वाचित सरकार के प्रतिनिधियों को नीति बनाने का संपूर्ण अधिकार है। केंद्र की यह योजना आरक्षण से बिल्कुल अलग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान-उत्कर्ष के लिए है। योजना समाज में भेदभाव पैदा नहीं करती, इसलिए यह संवैधानिक है। शुक्रवार को हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय पूर्ण पीठ ने तीन बनाम दो से यह व्यवस्था दी। यह फैसला गुजरात सरकार के लिए झटका है। राज्य का तर्क था कि केंद्र की यह योजना असंवैधानिक, अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन करने वाली धर्म आधारित योजना है। पिछले साल ही यह मामला पूर्ण पीठ के समक्ष भेजा गया था। फैसले के खिलाफ राज्य सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। बहरहाल, न्यायाधीश आरआर त्रिपाठी, जेबी पारडीवाला ने सहयोगी न्यायाधीशों के उलट मत दिया है। इन दो न्यायाधीशों ने योजना को भेदभावपूर्ण एवं असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि योजना लागू करने के लिए राज्य सरकार को किसी प्रकार के निर्देश दिए गए तो ये अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन होगा। इस तरह पूर्ण पीठ ने तीन बनाम दो से राज्य सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। योजना को संवैधानिक करार दिया है। राज्य के अधिवक्ता ने 134 (ए) के तहत सर्टिफिकेट मांग कर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के संकेत दे दिए हैं। हालांकि इस बारे में फैसला डिविजनल बैंच करेगी। 
 
क्या है मामला
 
केंद्र ने 2008 में उक्त योजना शुरू की थी।  फरवरी 2011 में आदम चाकी व अन्य ने केंद्र की उक्त योजना राज्य में लागू करवाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आवेदक का कहना था कि साल 1979 में राज्य सरकार ने छात्रवृति की दो योजनाएं शुरू की थीं लेकिन केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों संबंधी प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना को लागू नहीं किया है। वजह, इसमें एक समुदाय के विद्यार्थी बड़े पैमाने पर लाभान्वित होने वाले हैं। अक्टूबर-11 में यह मामला पूर्ण पीठ के पास भेज दिया गया। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने टिप्पणी की थी कि धर्म अथवा जाति के आधार पर विद्यार्थियों को छात्रवृति देने की केंद्र की योजना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन है। अतीत में ऐसे ही एक मामले में मुंबई हाईकोर्ट की एक पीठ ने अल्पसंख्यकों से जुड़ी ऐसी योजना को उचित और वाजिब ठहराया था। यूं दो पीठों के अलग-अलग मत होने से मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने अक्टूबर में मामला पूर्ण पीठ को सौंप दिया।
 
 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
10 + 5

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment