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दशकों पहले इस क्रिकेटर ने ठुकरा दिया था राज्यसभा की सदस्यता का प्रस्ताव
कुनाल पेठे | May 01, 2012, 01:03AM IST

बड़ा सम्मान है, दिल चाहता है किन्तु स्वास्थ्य नहीं देगा साथ...
शाह ने बताया कि बात 1978 की है। अप्रैल महीने में राज्यसभा की चार सीटें खाली हुई थीं। तब विजय मर्चेट क्रिकेट को अलविदा कर चुके थे। हालांकि वे समाजसेवा में सक्रिय थे। मोरारजी देसाई ने मर्चेट के साथ इस मुद्दे पर बात करनी चाही किन्तु ऐसा संभव नहीं हुआ। उन्होंने (मोरारजी) मुझे यह काम सौंपा। मैंने विजय मर्चेट से फोन पर बात की। मोरारजी देसाई का ऑफर दिया। ऑफर सुन कर विजय ने कहा था कि ‘मेरे मतानुसार यह मेरे लिए बड़ा सम्मान है। दिल चाहता भी है कि इसे स्वीकार कर लूं किन्तु अपने स्वास्थ्य के कारण मैं हवाई यात्रा नहीं कर सकता। इसलिए रेलवे से आवागमन करना पड़ता है। मैं राज्यसभा की एक भी बैठक में हिस्सा नहीं ले पाऊंगा। रेल यात्रा में ही समय निकल जाया करेगा। इससे मेरी सामाजिक गतिविधियों में अवरोध होगा।’
फोन पर बातचीत के बाद विजय ने तुरंत तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर विनम्रता के साथ उन्हें अपनी अनिच्छा से अवगत करवा दिया। उन्होंने कहा था कि मेरे मन में विकलांग और अंधजनों की सेवा और इनके पुनर्वास का काम अधिक महत्वपूर्ण है।
निवृति के बाद ही जुट गए थे सेवा मिशन में :
उल्लेखनीय है कि मर्चेट ने क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद ही विकलांग और अंधजनों के पुनर्वास के उद्देश्य से संस्था शुरू कर दी थी। वे इसको काफी अहमियत देते थे। संभव है कि इसी कारण उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रयास किया गया हो।
अब भी उनके नाम है क्रिकेट के कई रिकॉर्ड :
फस्र्ट क्लास क्रिकेट में मर्चेट बल्लेबाजी औसत 71.64 था, जो महान क्रिकेटर डॉन ब्रेडमैन के बाद दूसरे नंबर है, आज भी। 1951-52 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 154 रन की मैराथन पारी खेली थी। मर्चेट ने यह पारी 40 साल, 21 दिन की उम्र में खेली थी। इतनी उम्र में मैराथन पारी खेलने का रिकॉर्ड आज छह दशक बाद भी मर्चेट के नाम पर ही है।





