अहमदाबाद। यह 26 जनवरी, 2001 का दिन था। पूरा देश सुबह गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था। बच्चे हाथों में तिरंगा लिए स्कूलों की तरफ दौड़ रहे थे। लेकिन इसी खुशी के मौके पर गुजरात में मातम छा गया, क्योंकि यहां के दो जिले कच्छ व भुज में अचानक शांत व स्थिर धरती ने अपना रूप बदला, लोगों के पैर डगमगाने लगे। कोई समझ ही नही पा रहा था कि आखिर ये क्या हो रहा है?
कुछ ही सेकेंड्स के बाद, अब सिर्फ इंसानों के पैर नहीं डगमगा रहे थे, बल्कि बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के महल की तरह जमींदोज होने लगी थीं। धरती की कंपकंपी सिर्फ दो मिनट की ही थी, लेकिन इसी दो मिनट में सब खत्म। अब खुशी की आवाजें दर्दनाक चीखों में तब्दील हो चुकी थीं।
जब तक पूरे देश को इस घटना की जानकारी मिल पाती, तब तक कच्छ व भुज में श्मशान व कब्रिस्तान लाशों से पट चुके थे। इस भीषण त्रासदी में लाखों जिंदगियां तबाह हो गईं। कई माओं की गोद सूनी हो गई तो कई बच्चे अनाथ हो गए और कई अपाहिज, जिन्हें अब अपनी अंतिम सांस तक इस भयानक दर्द के साथ जीना है।
दिन : 26 जनवरी, 2001
समय : सुबह 8.46 मिनट
कंपन : 2 मिनट
एपी सेंटर : चोबारी गांव, भचाऊ तहसील से 9 किमी और भुज से 20 किमी की दूरी पर।
तीव्रता : 6.9 रिएक्टर स्केल
मौत : 20 हजार
घायल : 1,67,000
मकानों की तबाही : 4 लाख
भूकंप का असर : 700 किमी तक। 21 जिले के 6 लाख लोग बेघर हुए।
कच्छ जिले में मौत : 12,290
इस भयानक प्राकृतिक आपदा में कच्छ के 450 गांवों का तो नामोनिशान ही मिट गया था।
गुजरात में आया यह भूकंप कितना विनाशकारी था, देखें तस्वीरों में...