बेटे की खातिर पिता ने 62 की उम्र में शुरू की सेकंड इनिंग्स

अहमदाबाद। विक्रम सोमाणी ने 62 साल की उम्र में खुद को फिर बिजनेस में डुबा लिया है। 31 साल के बेटे विदुष का सपना जो पूरा करना है। उसकी दो महीने पहले हृदयाघात से मौत हो गई। वह चाहता था कि कंपनी के हर मुलाजिम व उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। और 400 करोड़ की कंपनी को पांच साल में 1500 करोड़ रुपए का बनाना।
उनकी कंपनी सेरा सेनिटरीवेअर शेयरबाजार में लिस्टेड है। इसमें 2200 कर्मचारी हैं। तीन साल पहले विक्रम ने खुद को कारोबार से अलग कर कमान विदुष को सौंप दी थी। बेटे की मौत के बाद उनके पास दो ही विकल्प थे। वे या तो 400 करोड़ की कंपनी बेच देते या बेटे का सपना पूरा करते। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। वे खुद काम में जुट गए। कंपनी अब एक हजार छात्रों वाले दो स्कूल चला रही है। अंग्रेजी, विज्ञान, गणित एवं कंप्यूटर के हर दिन फ्री?बैच लगवाए जा रहे हैं। हर विषय में फिलहाल 30-30 बच्चों को दाखिला दिया गया है जिसे जल्द 500 किया जाएगा। इसके अलावा वे कर्मचारी जो उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, कंपनी ने उनके लिए फ्री हायर एजुकेशन योजना बनाई है।
13वीं से पहले ही आ गए मैदान में: विदुष की मौत ने कंपनी के इन्वेस्टर-एनालिस्ट को हिला कर रख दिया। नुकसान या फिर कंपनी को बेचे जाने की खबरें चलने लगीं। यह सब देखते हुए विक्रम बेटे की तेरहवीं से पहले मुंबई जाकर एनालिस्ट और इन्वेस्टर से मिले। कंपनी के भावी विजन-मिशन की रणनीति साझा की। सभी ने विक्रम को साथ देने का भरोसा दिलाया। कंपनी का गिरा शेयर उछलकर साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। कारोबार 500 करोड़ रुपए हो गया है।






