इन नौ दिनों के लिए छह महीने की तैयारी

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव शुरू होने में बमुश्किल सात सप्ताह बचे हैं लेकिन शाम के बाद यहां कोई भी राजनीति की चर्चा नहीं कर रहा। सभी गरबा स्टेप्स, जोड़ीदार एवं संगीत में व्यस्त हैं। इन नौ दिनों के दौरान पूरा गुजरात दिन में सुनसान और रात में गरबे से आबाद रहता है। इस समय 70-साल के गुजराती के पैर भी थिरकने लगते हैं। यह करीब 300 करोड़ का 'बिजनेस' है।
गरबे में अब डिजाइनर टच आ गया है। डिजाइनर चनिया-चोली, केडिया। बैले डांस एवं गंगनम स्टाइल का गरबा इस साल ज्यादा लोकप्रिय है। नौ दिन के लिए गरबा सीखने के लिए लोग हजारों खर्च कर छह-छह महीने पसीना बहाते हैं। पिछले साल चैंपियन रहे ध्येय मेहता ने बताया कि वे हर साल जून-जुलाई से शुरूआत करते हैं। हर दिन दो घंटे तथा रविवार को तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करते हैं।
डांस अकादमी चलाने वाले राज सिनेचिया कहते हैं गरबा के बंपर प्राइज में स्कुटी,फॉरेन ट्रिप, कैश प्राइज आदि होते हैं। गरबे के दीवाने सीखने के लिए कोरियोग्राफर पर 10 से 15 हजार रुपए तक खर्च करते हैं। इन्हें शरीर में लचीलापन बढ़ाने से शुरूआत करनी होती है। इसके लिए अधिक से अधिक प्रैक्टिस। जीतने के लिए मैं नए गरबा स्टैप्स सिखाता हूं। सालला के स्टैप्स, हिप-हॉप विथ ढोल भी।
गरबा खेलने वाली युवतियों के पास नौ चनिया-चोली होती ही हैं। हर दिन के लिए एक। इनके लिए वे महीनों पहले शॉपिंग शुरू कर देती हैं। केवल चनिया की जोड़ीदार के केडिया-धोती से भी मैचिंग होनी चाहिए। अच्छी चढिय़ा-चोली 35-80 हजार रुपए में मिल जाती है। केडिया-धोती के साथ यह आंकड़ा 75 हजार से एक लाख के बीच पहुंच जाता है। कच्छ की हैंडीक्रॉफ्ट कारोबारी संस्था सृजन की मार्केटिंग हैड रश्मि गेरा बताती हैं कि इस साल उन्होंने ऑर्डर पर 16 कपल ड्रेस आस्ट्रेलिया भेजे हैं। कपड़ों के साथ गहने और जूते भी बदले हैं। धातु के ऑक्सीडाइज्ड गहनों के स्थान पर प्लास्टिक के गहने चलन में आ गए हैं। कुछ लोग वुडन गहनों की ओर भी झुक रहे है।
कभी रात-रात भर चलने वाले गरबा पर अब रात 12 बजे तक की पाबंदी लागू होने गई है। आधी रात के बाद स्ट्रीट फूड वालों की चांदी हो जाती है। लेकिन नौ-दिनों तक गरबा करने वाले देर रात नहीं खाते। इनका अपना एक निश्चित डाइट-प्लान होता है। कुल मिलाकर गुजरात में नवरात्रि पूजा-पाठ के अलावा मस्ती का त्योहार भी है।






