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... जरा ठहरो ! मैं भी अपनी प्यास बुझा लूं

 
 
 
Source: bhaskar network   |   Last Updated 11:02(31/01/12)
 
 
 
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... जरा ठहरो ! मैं भी अपनी प्यास बुझा लूं
 
 
 
 
 
 
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जूनागढ़। प्रकृति प्रदत्त फुर्ती और चचंलता का पर्याय माने जाने वाले हिरनों में भी परिवार और समूह भावना कूट-कूट कर भरी होती है। कनकाई वन क्षेत्र के इस दृश्य से तो ऐसा ही लगता है। कनकाई गिर अभ्यारण्य के विसावदर रेंज का हिस्सा है।

 

शुक्रवार को इस वन क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से बने एक जलाशय के किनारे समूची चंचलता छोड़ हिरनों का यह झुंड कुछ यूं प्यास बुझाते नजर आया। सामान्यत: सौराष्ट्र का गिर अभ्यारण्य एशियाटिक लॉयन की शरणस्थली के रूप में पहचाना जाता है किन्तु यह विविधताओं से भरा हुआ है। सिंहवंश-हिरन अथवा तेंदुए ही नहीं बल्कि अन्य वन्यजीव भी अभ्यारण्य में फल-फूल रहे हैं।

 

(फोटो : वरशींग झाला)

 
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