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यहां लोग ‘गोरा’ नहीं ‘काला’ होने के लिए लगाते हैं क्रीम

 
Source: bhaskar network   |   Last Updated 11:01(08/02/12)
 
 
 
 

धीरज ठाकोर, वडोदरा। भारत में बड़े पैमाने पर युवक गोरी त्वचा वाली युवतियों को ही पसंद करते हैं। जबकि यूरोप के लोगों को काला रंग इतना सुहाता है कि वे काला होने की तमाम कोशिशें करते हैं। इसके लिए वे तरह-तरह की क्रीम लगाते हैं और घंटों तक सनबाथ लेते हैं, जिससे त्वचा के रंग में सांवलापन आ जाए।

 

खबर पढ़कर आप चौंक गए हों तो हम आपको बताते चलें कि यह हमारा कहना नहीं, बल्कि जर्मनी के प्रोफेसर थॉमस रूजीका का कहना है।

 

मौका था.. गुजरात के वडोदरा शहर मंे आयोजित ‘इज ब्युटी ओनली स्कीन डीप? द इंडियन ऑब्सेशन विद फेयरनेस’ विषय पर आयोजित एक परिसंवाद का। इस कार्यक्रम में जर्मनी लुडविग मेक्समीलन युनि. के प्रोफेसर-डर्मेटोलॉजिस्ट थॉमस रूजीका ने भी शिरकत की। थॉमस में अपने भाषण में कहा कि भारत की तुलना में यूरोप के ज्यादातर लोग डार्क स्किन अत्यधिक पसंद करते हैं।

 

लोगों का डार्क स्किन से इतना लगाव है कि वे इसके लिए तरह-तरह के क्रीम लगाते हैं, और घंटों-घंटों तक सनबाथ का सहारा लेते हैं। और इसी का दुष्परिणाम है कि यूरोप की कुल आबादी के एक प्रतिशत लोग स्किन कैंसर से पीड़ित हैं।

 

 

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