भगवान से मुलाकात :
मुंबई स्थित मेरे चाचा के बंगले के ठीक सामने ही रजनीश का निवास स्थल था। इसलिए उनसे मुलाकात की मेरी इच्छा जल्दी ही पूरी हो गई। दरअसल, यह मुलाकात मेरे लिए मेरा अंत था। हालांकि, यह मुलाकात मेरे जीवन का एक यादगार पल भी साबित हुआ। मैं उनसे मिलने के लिए इतनी बेताब थी कि बिना अप्वाइंटमेंट के ही उनसे मिलने पहुंच गई थी। उस बहुमंजिला इमारत में स्थित उनके फ्लैट में तीन कमरे थे। उनकी सचिव मां योगी लक्ष्मी ने (लोग उन्हें लक्ष्मी मां से संबोधित किया करते थे) अपार्टमेंट में प्रवेश करते ही रिसेप्शन के डेस्क से मेरा स्वागत किया।
मां लक्ष्मी ने रजनीश के पास जाकर मेरे बारे में बताया। थोड़ी देर बाद मुझे व मेरे पिता को अंदर जाने की अनुमति मिल गई। इस समय रजनीश कमरे के कोने में एक कुर्सी पर बैठे हुए थे। वे सफेद कपड़ों में थे। उनके ठीक पीछे एक छोटी सी टेबल थी, जिस पर कई किताबें पड़ी थीं। उनकी कुर्सी के सामने दो पलंग थे। बस इन चीजों के अलावा लगभग पूरा कमरा खाली था।