वह रात मेरे जीवन की सबसे लंबी रात थी। मेरे लिए दूसरे दिन दोपहर तक का इंतजार करना बहुत मुश्किल हो रहा था। मेरे लिए तो उस समय जैसे दुनिया की सारी घड़ियां रुक गई थीं। आखिरकार, इस लंबे इंतजार का अंत आया और मैं उनसे मिलने जा पहुंची।
मैंने उन्हें बताया कि कितनी मुश्किल से यह समय काटा। मैंने उनसे कहा कि मुझे नींद नहीं आ रही थी, मुझे भूख-प्यास भी नहीं लग रही थी। मैं मानसिक बीमारी का अनुभव कर रही थी। मेरी यह बात सुनकर ओशो ने कहा, ‘शीला यह स्वाभाविक है, क्योंकि तुम मेरे प्रेम में हो और मैं तुम्हारे प्रेम में हूं।’