पुणे स्थित आश्रम
पुणे स्थित धीरे-धीरे विकसित हो रहा था। ओशो का नाम अब दुनिया भर में प्रसिद्ध होने लगा था। प्रतिदिन हजारों की संख्या में साधक यहां पहुंच रहे थे। कुछ ही समय में पुणे स्थित इस आश्रम में साधकों की संख्या अत्यधिक हो गई और आपसी विवाद भी बढ़ने लगे।
भगवान ओशो इस स्थिति से वाकिफ थे। उन्होंने लक्ष्मी को कोरेगांव आश्रम के आसपास के सभी घरों को खरीदने की इच्छा बताई। हालांकि, यह समय जमीन खरीदने के लिए अनुकूल नहीं था। इसके अलावा वे इतनी जमीन खरीदने में सक्षम भी नहीं थे, जबकि लोग ऐसा मानते थे कि ओशो बहुत धनवान हैं और उनके साथी कोई भी कीमत चुकाने में सक्षम हैं।