आश्रम बन चुका था सेक्स मंडी :
शीला ने लिखा है कि ओशो के आश्रम में अध्यात्म के नाम पर सेक्स की मंडी सजती थी। आश्रम के शिविरों में सबसे ज्यादा चर्चा भी सेक्स पर ही होती थी। भगवान ओशो अपने भक्तों को बताते थे कि सेक्स की इच्छा को दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि ये कई कष्टों का कारण है। वे सेक्स को बिना किसी निर्णय के स्वीकार करने के लिए कहते थे। भगवान के उपदेशों पर चलते हुए उनके सभी शिष्य बिना किसी हिचकिचाहट और नैतिक दबाव के आश्रम में खुलेआम सेक्स करते थे। शीला के अनुसार आश्रम का हर संन्यासी एक महीने में करीब 90 लोगों के साथ सेक्स करता था।