पानी की तरह बरसता था आश्रम में पैसा
किताब के मुताबिक भगवान ओशो बिजनेस करना भी बखूबी जानते थे। उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाया हुआ था कि आश्रम के हर हिस्से से आय होती थी। उनके प्रवचन सुनने के लिए आश्रम में प्रवेश शुल्क लगता था। आश्रम में चिकित्सकों का एक ग्रुप भी कार्यरत था। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ आश्रम के अंदर बुफे में खान-पान की भी अच्छी व्यवस्था थी। आश्रम में आने वाले लोग अपनी इच्छानुसार खाना लेकर भुगतान करते थे। इसके अलावा आश्रम में कई दूसरी शुल्क आधारित सेवाएं भी चलती थीं। इन सभी स्रोतों के जरिए आश्रम में पानी की तरह पैसा बरसता था। भगवान ओशो के आश्रम में हर दिन दान पाने के नए तरीके सोचे जाते थे।