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नरोडा-पाटिया मामले में फैसला 29 अगस्त तक टला
divya bhaskar network | Jul 01, 2012, 15:18PM IST
क्या था मामला:
गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को 27 फरवरी 2002 को जिंदा जलाए जाने के बाद 28 फरवरी को गुजरात बंद का एलान किया गया था। इस बंद के एलान के दौरान नरोडा-पाटिया विस्तार में 10 हजार से ज्यादा दंगाइयों ने लूटपाट करने के साथ रसोई गैस के बोतल से अल्पसंख्यक जाति के लोगों पर हमला किया था। इसमें 97 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में से 94 की लाश मिली थी, लेकिन 3 लोगों का आज तक कुछ भी पता नहीं चल सका है।
इस केस के सिलसिले में पुलिस ने कुल 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की जांच पर प्रतिबंध लगा दिया था, बाद में 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई थी। एसआईटी ने जांच कर 24 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश किया था।
गुजरात हाईकोर्ट ने नरोडा-पाटिया समेत दंगों के 9 गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए विशेष 9 जज की नियुक्ति की थी। इनमें से विशेष जज डा. ज्योत्सनाबेन याज्ञिक ने जुलाई 2009 में आरोपियों के खिलाफ आरोप नामा दर्ज किया था और 703 में से 327 गवाहों के बयान लिए थे। इसी सुनवाई के दौरान ज्योत्सनाबेन का तबादला कर दिया गया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
इसके बाद पिछले तीन महीनों के दौरान इस केस की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले के लिए 30 जून, 2012 की तारीख़ मुकर्रर की गई थी। लेकिन आज स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला 29 अगस्त तक टाल दिया है।







